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नई दिल्ली : ICC पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर जारी विवाद में फैसला आने से कुछ घंटे पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को पत्र लिखकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के उस रुख का समर्थन किया है, जिसमें बांग्लादेश ने भारत में अपने मैच खेलने से इनकार किया है। हालांकि, इस देर से आए समर्थन के बावजूद आईसीसी के फैसले पर इसका असर पड़ने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

पाकिस्तान ने ICC से क्या कहा?

ESPN क्रिकइन्फो की रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीबी ने अपने ईमेल में क्षेत्रीय राजनीतिक हालात और खिलाड़ियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए बांग्लादेश के पक्ष को सही ठहराया। इस पत्र की कॉपी अन्य आईसीसी सदस्य बोर्ड्स को भी भेजी गई, जिससे यह संदेश और ज्यादा जोरदार हो गया। हालांकि, यह पत्र ऐसे समय आया है जब आईसीसी पहले ही 21 जनवरी को होने वाली अहम बोर्ड मीटिंग से पहले अपने रुख पर कायम नजर आ रही है।

ICC क्यों नहीं बदलना चाहता फैसला?

आईसीसी सूत्रों के अनुसार, टूर्नामेंट की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और इस समय किसी भी तरह का बदलाव करना व्यावहारिक नहीं है। ब्रॉडकास्ट और स्पॉन्सरशिप कॉन्ट्रैक्ट पहले ही फाइनल हो चुके हैं। टिकटिंग और लॉजिस्टिक्स की पूरी योजना तय है। टीमों की तैयारी तय वेन्यू के अनुसार हो चुकी है।

ICC ने साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की सह-मेजबानी में तय कार्यक्रम के अनुसार ही खेला जाएगा। भारत के भीतर कुछ वेन्यू बदलने पर विचार जरूर हुआ, लेकिन बांग्लादेश के मैच किसी अन्य देश में कराने का प्रस्ताव नामुमकिन माना गया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह विवाद तब गहराया जब बीसीसीआई ने आईपीएल 2026 के दौरान मुस्ताफिजुर रहमान को रिलीज करने को लेकर कोलकाता नाइट राइडर्स से बातचीत की। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टीम के भारत दौरे पर आपत्ति जताई और बीसीबी के फैसले को समर्थन दे दिया।

कौन-कौन से प्रस्ताव खारिज हुए?

बांग्लादेश के ग्रुप मैच श्रीलंका में कराने का सुझाव, आयरलैंड के साथ ग्रुप बदलने का प्रस्ताव, पाकिस्तान में मैच कराने की अटकलें। इन सभी विकल्पों को आईसीसी ने समय की कमी और संचालन संबंधी दिक्कतों के चलते खारिज कर दिया।

पाकिस्तान के समर्थन का क्या असर पड़ेगा?

राजनीतिक तौर पर यह कदम पाकिस्तान और बांग्लादेश की एकजुटता दिखाता है और क्षेत्रीय क्रिकेट कूटनीति में पाकिस्तान की मौजूदगी दर्ज कराता है। लेकिन व्यावहारिक रूप से आईसीसी की स्थिति मजबूत है। यदि आईसीसी अपने फैसले पर अडिग रहती है, तो बांग्लादेश के सामने दो ही विकल्प होंगे— तय कार्यक्रम के अनुसार भारत में खेलना या फिर प्रतिबंध और प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान झेलना।

ICC की प्राथमिकता क्या है?

आईसीसी इस समय सबसे ज्यादा जोर स्पष्टता, स्थिरता और मिसाल (precedent) पर दे रही है। बड़े टूर्नामेंट में आखिरी समय पर बदलाव न सिर्फ आयोजन की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं, बल्कि खिलाड़ियों की तैयारी और फैंस के भरोसे को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अब सभी की नजरें आईसीसी की बोर्ड मीटिंग पर टिकी हैं, जहां इस विवाद पर अंतिम मुहर लगनी है।