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क्राइस्टचर्च : दिग्गज क्रिकेटर  मिताली राज ने विश्व कप से पहले संन्यास लेने का संकेत दिया था लेकिन भारत की अनुभवी कप्तान ने रविवार को यहां दक्षिण अफ्रीका से हारकर विश्व कप के सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने के बाद कहा कि दिल तोड़ने वाले परिणाम के बाद भविष्य के बारे में फैसला करने का यह सही समय नहीं है। 

छह वनडे विश्व कप खेलने वाली इकलौती महिला क्रिकेटर ने कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आखिरी लीग मैच में तीन विकेट की हार की निराशा से बाहर नहीं निकल पाई है। आपने आज जो हुआ उसे समझने और मुझे मेरे भविष्य के बारे में सोचने के लिए  एक घंटे का भी समय नहीं दिया। जब आप विश्व कप के लिए एक साल से अधिक समय तक लगातार मेहनत के साथ तैयारी करते  है और आपका अभियान इस तरह से समाप्त होता है तो काफी निराशा होती है। इसे स्वीकार करने और  वहां से आगे बढ़ने में समय लगता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का भविष्य कैसा भी हो, मैंने वास्तव में अपने भविष्य के बारे में नहीं सोचा है। सचिन तेंदुलकर और जावेद मियांदाद के बाद मिताली छह विश्व कप में खेलने वाली तीसरी क्रिकेटर (पुरुष और महिला) है। उन्होंने पहले अपने संन्यास के बारे में संकेत देते हुए कहा था कि उनके लिए ‘जीवन का एक चक्र पूरा हुआ' क्योंकि वह अपनी ‘यात्रा को खत्म करने की ओर देख रही है। उन्होंने हालांकि रविवार को कहा कि वह अपने करियर के भविष्य का फैसला तब करेगी जब ‘भावनाएं काबू में होगी'। 

मिताली से जब पूछा गया कि क्या भारतीय टीम की जर्सी में यह उनका आखिरी मैच था तो उन्होंने कहा कि मैं अभी इस पर बात करने के लिए सही स्थिति में नहीं हूं। मेरे लिए अभी अपने भविष्य पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हमने आज जिस तरह का प्रदर्शन किया वह देखते हुए अभी भावनाओं पर काबू पाना मुश्किल है। विश्व कप से बाहर होने से भारत की दिग्गज तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी का शानदार करियर भी समाप्त हो सकता है, जो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मांसपेशियों में खिंचाव के कारण मैदान पर नहीं उतर सकी थी।

मिताली ने कहा कि खिलाड़ियों की एक पीढ़ी जाएगी तो दूसरी आएगी। टीम को आगे बढ़ते रहना होगा। हर विश्व कप के बाद टीम में हमेशा बदलाव होता है। इसमें नये चेहरे भी होंगे और कुछ अनुभवी खिलाड़ी होंगे। भारतीय टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने के बाद दक्षिण अफ्रीका की पारी की शुरुआत में विकेट लेने में नाकाम रही और मिताली ने कहा कि टीम को झूलन गोस्वामी की कमी खली।

उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि उनकी मौजूदगी से काफी फर्क पड़ता। उसे अलग - अलग तरह के पिचों और हर परिस्थिति में खेलने का इतने वर्षों का अनुभव है। गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व करने के लिए उनके जैसे दिग्गज खिलाड़ी के होने से काफी असर होता। मुझे यकीन है कि वह बहुत निराश महसूस कर रही होगी कि भारतीय टीम के आखिरी मैच का वह हिस्सा नहीं बन सकी। अभ्यास सत्र में वह चोटिल हो गई थी और फिर उबरने में नाकाम रही। हम यह मैच जीतना चाहते थे ताकि वह सेमीफाइनल में टीम के साथ रहे। 

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