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मुंबई : पूर्व भारतीय क्रिकेटर सौरभ गांगुली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नए अध्यक्ष पद के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल किया और इस प्रतिष्ठित पद के लिए उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। गांगुली ने नामांकन दाखिल करने के बाद कहा कि पिछले तीन वर्षों में बीसीसीआई में जो खराब हालात थे उन्हें सुधारना और प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की स्थिति को बेहतर करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

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उन्होंने कहा, ‘यह हमारा दायित्व है कि सभी तरह की चीजें सही तरीके से हों। मेरे लिए हालांकि प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेट खिलाड़यिों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करना होगी। साथ ही कोशिश होगी कि सभी चीजें अपनी जगह पर रहें।' पूर्व भारतीय कप्तान ने साथ ही कहा कि निश्चित तौर पर यह बहुत अच्छा अहसास है, क्योंकि वह देश के लिए खेले और कप्तान भी रहे। अध्यक्ष पद की दौड़ में बृजेश पटेल को पछाड़ने के बाद अब दादा इस पद के अकेले उम्मीदवार रह गए हैं।

बीसीसीआई नियमों के अनुसार अनिवार्य कूलिंग ऑफ अवधि के कारण उन्हें जुलाई 2020 में पद छोड़ना होगा। गांगुली के पास अध्यक्ष पद पर ज्यादा समय नहीं रहेगा। बीसीसीआई के नए संविधान के अनुसार किसी पदाधिकारी को तीन साल की कूलिंग ऑफ अवधि में जाना पड़ेगा यदि उसने किसी राज्य संघ या बीसीसीआई स्तर पर लगातार छह वर्ष पूरे कर लिए हों। गांगुली बंगाल क्रिकेट संघ के पदाधिकारी हैं जहां वह हाल ही में अध्यक्ष चुने गए थे। उनके पास कूलिंग ऑफ अवधि आने तक 10 महीने बाकी हैं।  

देश के सबसे सफल कप्तानों में से एक गांगुली ने कहा, ‘निर्विरोध चुना जाना ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। यह विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा संगठन है और जिम्मेदारी तो है ही, चाहे आप निर्विरोध चुने गए हों या नहीं। भारत क्रिकेट की महाशक्ति है तो यह चुनौती भी बड़ी होगी।' गांगुली ने साथ ही कहा कि उन्होंने कभी भी बोर्ड के अध्यक्ष बनने की लालसा प्रकट नहीं थी और सदस्यों द्वारा चुने जाने पर वह इस पद को अपनाने को राजी हुए हैं।

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