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नई दिल्ली : लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद लंबे समय से पदों पर बैठे दिग्गज तो हट गए लेकिन नए प्रबंधन में भी इनका रुसख पूरी तरह से हावी होता दिख रहा है। एन श्रीनिवासन, निरंजन शाह, अनुराग ठाकुर, अमित शाह, परिमल नाथवानी और चिरायु अमीन जैसे लोग बीसीसीआई के नए संविधान के मुताबिक पद संभालने के लिए योग्य हैं। लेकिन, 23 अक्टूबर को बीसीसीआई की आम सभा की बैठक में जब प्रशासकों की समिति अपना पद छोड़ेगी, तब जो नए चेहरे आएंगे वह इन्हीं दिग्गजों के रिश्तेदार होंगे। ऐसा होने से एक बार फिर बीसीसीआई पर परिवारवाद का बोलबाला हो जाएगा।
यह है इन पदों पर
1. एन श्रीनिवासन जोकि बीसीसीआई के पूर्व और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष रह चुके हैं, की बेटी रूपा गुरुनाथ नए तमिलनाडु क्रिकेट संघ की अध्यक्षा बन गई हैं।
2. गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन में राज्यसभा सांसद और पूर्व राज्य संघ के उपाध्यक्ष परिमल नथवाणी के बेटे धनराज भी इसके नए उपाध्यक्ष हैं।
3. बीसीसीआई और हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के भाई अरुण अब राज्य क्रिकेट को संभालेंगे। 
4. सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एससीए) में नए अध्यक्ष निरंजन शाह के पुत्र जयदेव शाह हैं, जो चार दशकों से इसके सचिव थे। 
5. केंद्रीय गृह मंत्री और पूर्व में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह स्टेट एसोसिएशन के नॉमिनी हैं। 
6. बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष चिरायु अमीन के बेटे प्रणव नए बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं, जबकि दिवंगत जयलंत लेले के बेटे अजीत सचिव हैं।
7. विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर के बेटे अद्वैत पांच साल से उपाध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं।
8. उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में यदुपति सिंघानिया अपने पिता गौर हरि के लगभग दो दशक लंबे शासनकाल के बाद नए बॉस हैं। 
9. छत्तीसगढ़ में पूर्व क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया के बेटे प्रभुतेज अब राज्य इकाई का कार्यभार देखते हैं।
मुंबई, गोवा, ओडिशा और नागालैंड जैसे राज्य संघों में भी परिवारवाद का बोलबाला रहा है।

वहीं, बीसीसीआई में बढ़ते परिवारवाद पर सीओए के चेयरमैन विनोद राय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा- हमारा काम सुप्रीम कोर्ट के द्वारा हमें दिए गए निश्चित जनादेश को पूरा करना था। मेरे पास इस मुद्दे पर कोई भी विचार नहीं हैं। चुनाव कौन जितता है, इससे मेरा कोई वास्ता नहीं है।
 

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