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नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा 33 साल के हो गए हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि 2012 में ओझा पर एक समय ऐसा भी आया था जब उनकी जान पर बन आई थी। दरअसल ओझा श्रीलंकाई टूर के दौरान नैट पर प्रैक्टिस कर रहे थे। तभी बल्लेबाज का एक शॉट उनकी गर्दन पर जा लगा। बॉल लगते ही ओझा जमीन पर गिर गए। टीम मेंबर्स उन्हें कोलंबो के अस्पताल में ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी मिल गई लेकिन डॉक्टरों ने बाद में प्रेस वार्ता के दौरान जो कहा उससे सब हैरान हो गए।

This cricketer who was saved from dying 7 years ago, is celebrating 33rd birthday today

प्रेस वार्ता के दौरान ओझा का इलाज करने वाले डॉक्टर्स ने कहा था कि ओझा की गर्दन पर जिस जगह गेंद लगी थी अगर गेंद थोड़ी ऊपर होती तो यह गले के पास से गुजरती उस नाड़ी से टकराती जोकि दिल से दिमाग को निर्देश पहुंचाती है। इस नाड़ी पर प्रैशर तो पड़ा थालेकिन ज्यादा नहीं। अगर यह नाड़ी डैमेज हो जाती तो ओझा की मौके पर ही मौत संभव थी। 

This cricketer who was saved from dying 7 years ago, is celebrating 33rd birthday today

ओडिशा में जन्मे बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने भारत के लिए 24 टेस्ट, 18 वनडे और 6 टी20 मैच खेले हैं। उन्होंने 2009 में अपने टेस्ट डेब्यू के दौरान ही रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने फील्डिंग करते हुए मैच की पहली ही गेंद पर तिलकरत्ने दिलशान का कैच लपका था। ऐसा कर वह यह कारनामा करने वाले दुनिया के एकलौते क्रिकेटर बन गए हैं।

आईपीएल में जीत चुके हैं पर्पल कैप

प्रज्ञान ओझा का करियर उभारने में सबसे बड़ा काम किया आईपीएल ने। वह तीन बार टाइटल जीतने वाली टीम के साथ खेल चुके हैं। साल 2009 में डेक्कन चार्जर्स और 2 बार मुंबई इंडियंस (2013 और 2015) के साथ। साल 2010 तो उनके लिए और भी बढिय़ा था। आईपीएल के इस तीसरे सीजन में उन्होंने 21 विकेट लेकर पर्पल कैप जीती थी। टूर्नामेंट में वह यह कारनामा करने वाले इकलौते स्पिनर हैं। हालांकि 2016 में अनसोल्ड रहने के बाद वह अब तक आईपीएल नहीं खेल पाए हैं।

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