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नई दिल्ली : भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा का कहना है कि बचपन में वह अपने मोहल्ले की आंटियों और अंकल से खूब परेशान होती थी क्योंकि वह रोक-टोक बहुत करती थ्ीं। सानिया का कहना है कि वह अक्सर उन्हें कहती थी कि वह बाहर न खेले। अगर उसने ऐसा किया तो उसका रंग ‘सांवला’ पड़ जाएगा और ‘कोई उससे शादी नहीं’ करेगा। सानिया विश्व आर्थिक मंच में महिलाओं और नेतृत्वक्षमता पर पैनल चर्चा में पहुंची थीं। उन्होंने इस दौरान अपने जिंदगी के संघर्ष सबके साथ साझा किए। सानिया भारत की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ी हैं और डब्ल्यूटीए एकल सूची में 2007 के मध्य में कैरियर की सर्वश्रेष्ठ 27वीं रैंकिंग पर पहुंची थीं।

मैं तब आठ साल की थी जब...

32 साल की सानिया ने कहा- शुरूआत करूं तो सबसे पहले माता-पिता, पड़ोसियों, आंटियों और अंकल को यह कहना बंद करना होगा कि आप सांवली हो जाओगी और अगर तुम खेलोगी तो कोई भी तुमसे शादी नहीं करेगा। मैं महज 8 साल की थी जब मुझे यह कहा गया था और हर किसी को लगता था कि कोई मुझसे शादी नहीं करेेगा क्योंकि मैं सांवली हो जाऊंगी। मैंने सोचा कि मैं बच्ची ही हूं और सब ठीक होगा। 

इस संस्कृति को बदलना चाहिए : सानिया


सानिया ने कहा कि लोगों के दिमाग में यह इतना भरा हुआ है कि लड़कियों को खूबसूरत बने रहना चाहिए और इसमें यह भी कि उसे गोरा होना चाहिए। मैं नहीं जानती ऐसा क्यों। इस संस्कृति को बदलना चाहिए। पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक की पत्नी सानिया बच्चे के जन्म के ब्रेक के बाद अगले साल पेशेवर सर्किट में वापसी पर काम कर रही हैं।

पीटी ऊषा से ली पे्ररणा

अपने टेनिस सफर पर बात करते सानिया ने कहा- संघर्ष के समय महान धाविक पीटी ऊषा उनकी प्रेरणा बनीं। अब समय बदल गया है। कई महिला एथलीट मौजूदा खिलाडिय़ों के लिए आदर्श बन रही हैं। सानिया बोलीं- मुझे गर्व महसूस होता है कि मैंने महिलाओं को खेल अपनाने में थोड़ी सी भूमिका अदा की। मैं जिस महिला खिलाड़ी से प्रेरणा ले सकती थी तब वह पीटी ऊषा थीं। आज हम पीवी सिंधू, साइना नेहवाल, दीपा करमाकर और कई अन्य का नाम ले सकते हैं।

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