नई दिल्ली : भारत के पूर्व क्रिकेटर और नेशनल सेलेक्टर सबा करीम का मानना है कि अगर दूसरी टीमें ऑस्ट्रेलिया जैसी दबदबा बनाने वाली टीम (जिसने अपना सातवां महिला T20 वर्ल्ड कप खिताब जीता) को चुनौती देना चाहती हैं, तो उन्हें ज्यादा आक्रामक रवैया अपनाना होगा और रणनीति के मामले में ऑस्ट्रेलिया से बेहतर सोचना होगा। मशहूर लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर बड़े मैचों में खेलने का अपना जज्बा दिखाया। उन्होंने खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड को 7 विकेट से बुरी तरह हराया। उन्होंने मेजबान टीम को 150/4 पर रोकने के बाद 151 रन का लक्ष्य 17 गेंदें बाकी रहते ही हासिल कर लिया। इस तरह ऑस्ट्रेलिया महिला टीम ने रिकॉर्ड 7वीं बार टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।
सबा करीम ने जियोस्टार पर कहा, 'दूसरी टीमें इस ऑस्ट्रेलियाई टीम का मुकाबला तभी कर सकती हैं जब वे थोड़ी ज्यादा आक्रामक हों और रणनीति के मामले में उनसे एक कदम आगे हों, क्योंकि खिलाड़ी-दर-खिलाड़ी तुलना में वे उनका मुकाबला नहीं कर सकतीं। भारत के लिए भी यह एक बहुत बड़ा सबक है कि ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला करने और उन्हें हराने के लिए उन्हें ऐसे खिलाड़ियों के बारे में पहले से सोचना होगा जिनकी उन्हें जरूरत है - ऐसे खिलाड़ी जो टी20 इंटरनेशनल में ज्यादा स्ट्राइक रेट से तेजी से रन बना सकें।'

अनुभवी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के काम करने के तरीके की तारीफ करते हुए करीम ने दूसरे इंटरनेशनल क्रिकेटरों से कहा कि वे इस अंतर को कम करने के लिए खुद से मुश्किल सवाल पूछें। उन्होंने आगे कहा, 'एलिस पेरी को देखिए; यह उनका 10वां वर्ल्ड कप है। उन्हें इतनी कड़ी मेहनत करने और अपने स्ट्राइक रेट को 120 से 140 तक बेहतर करने की क्या जरूरत है? वह अपने कम्फर्ट जोन में रह सकती थीं, यह सोचकर कि अगर वह रन नहीं भी बनाएंगी तो भी ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप जीत जाएगा। लेकिन उन्होंने सुधार के लिए मेहनत की। बेथ मूनी 140 के स्ट्राइक रेट से खेल रही हैं। T20 फॉर्मेट में यही फर्क है। जब तक खिलाड़ी खुद से मुश्किल सवाल नहीं पूछेंगे, उस स्तर तक पहुंचना मुश्किल होगा।'
उन्होंने यह भी कहा कि डरपोक बल्लेबाजी का तरीका ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम पर दबाव नहीं बना सकता। उन्होंने कहा, 'इंग्लैंड ने पावरप्ले में सिर्फ 39 रन बनाए और दो विकेट गंवा दिए। वे वहीं पर आधा मैच हार गए। नैट साइवर-ब्रंट कप्तान और शानदार बल्लेबाज हैं, लेकिन उन्होंने 53 गेंदों पर सिर्फ 58 रन बनाए, उनका स्ट्राइक रेट 109 का था। आप ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को इतने डरपोक रवैये से कैसे हरा सकते हैं? आपको 20 ओवर में कम से कम 175-180 रन बनाने होंगे, निडर रवैया अपनाना होगा, तभी आप इस टीम पर दबाव बना सकते हैं।'

इंग्लैंड के रवैये और ऑस्ट्रेलिया के शानदार रन-चेज की तुलना करते हुए करीम ने बताया कि कैसे शुरुआती ओवरों में ही 151 रन का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया गया। उन्होंने कहा, 'जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने क्या किया? उन्होंने पावरप्ले में ही चेज की कमर तोड़ दी। बेथ मूनी ने भी यही कहा कि उनकी कोशिश पावरप्ले में ही आधा मैच खत्म करने की थी। और आखिर में, ठीक वैसा ही हुआ। फोबे लिचफील्ड और बेथ मूनी ने पहले छह ओवरों में 62 रन जोड़े। मैच वहीं खत्म हो गया। इसलिए मुझे लगता है कि यही रणनीतिक समझ ऑस्ट्रेलिया को बाकी सभी टीमों से अलग बनाती है।'