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नई दिल्ली : महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने कहा कि भारत का पहला दिन-रात्रि टेस्ट (Day Night Test) तभी सफल होगा जब ईडन गार्डन्स (Eden Gardens) में ओस से प्रभावी तरीके से निपटा जाएगा। उन्हें अंदेशा है कि ओस से तेज गेंदबाजों और स्पिनरों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तेंदुलकर ने भारत में टेस्ट मैच दूधिया रोशनी में कराने का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘अच्छा कदम’ है और दर्शकों को इस पारंपरिक प्रारूप की ओर खींचकर लाएगा। भारत अपना पहला दिन-रात्रि टेस्ट कोलकाता में 22 नवंबर से बांग्लादेश के खिलाफ गुलाबी गेंद से खेलेगा। तेंदुलकर ने इसके साथ ही गांगुली के डे नाइट टेस्ट के लिए किए गए प्रयास को सराहा।

सचिन तेंदुलकर ने कहीं 5 महत्वपूर्ण बातें

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1. एक बार गेंद गीली हो गई तो ना तो तेज गेंदबाज अधिक कुछ कर पाएंगे और ना ही स्पिनर। इस तरह से गेंदबाजों की परीक्षा होगी। लेकिन अगर ओस नहीं होती है तो यह अच्छा कदम होगा।

2. ओस बड़ी भूमिका निभाएगी। हमें देखने की जरूरत है कि वहां कितनी ओस पड़ेगी। ओस फैसला करेगी कि दोनों टीमें किस हद तक प्रतिस्पर्धा पेश करेंगी। हालात का किसी चीज (प्रतिस्पर्धा पेश करने की क्षमता) पर असर नहीं पडऩा चाहिए।

3. गुलाबी गेंद से सामंजस्य बैठाने की जरूरत होगी। देखना होगा यह गेंद रंग कब तक छोड़ती है। इसके रंग को बरकरार रखने के लिए पिच पर कम से कम आठ मिलीमीटर घास छोडऩी होगी। इससे तेज गेंदबाजों को मदद मिलेगी लेकिन अच्छा स्पिनर भी प्रभावी हो सकता है। विकेटकीपर अहम भूमिका निभाएगा जो पिच की गति देखकर अपने गेंदबाजों को गाइड कर सकता है।

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4. डे नाइट टेस्ट में गुलाबी गेंद का सामना करने के लिए बल्लेबाजों को नेट पर अलग-अलग तरह की गेंदों के साथ अभ्यास करने की जरूरत है। नई गुलाबी गेंद, 20 ओवर पुरानी गुलाबी गेंद, 50 ओवर पुरानी गुलाबी गेंद और 80 ओवर पुरानी गेंद।

5. टीम इंडिया के खिलाडिय़ों को दलीप ट्राफी (Duleep Trophy) खेल चुके सभी खिलाडिय़ों से सुझाव लेने चाहिए जो पिछले तीन साल से इस प्रतियोगिता में खेल रहे हैं। दलीप ट्राफी मैच दूधिया रोशनी में खेले गए थे। ऐसे में भारतीय क्रिकेटरों के पास जानने के लिए काफी चीजें होंगी। 

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