स्पोर्ट्स डेस्क : टी20 विश्व कप 2026 में ग्रुप चरण में अजेय रहने के बावजूद भारतीय टीम की कुछ कमजोरियां अब खुलकर सामने आ गई हैं। सुपर 8 जैसे निर्णायक दौर से पहले टीम संयोजन और बल्लेबाजी क्रम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर सलामी बल्लेबाज Abhishek Sharma की लगातार खराब फॉर्म टीम प्रबंधन के लिए बड़ी चिंता बन गई है। इसके अलावा नंबर तीन पर खेल रहे Tilak Varma का धीमा स्ट्राइक रेट भी दबाव बढ़ा रहा है। अब दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सुपर 8 की शुरुआत से पहले भारत को अपनी रणनीति में सुधार करना बेहद जरूरी होगा। अगर टीम को खिताब बचाने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ना है, तो इन कमजोरियों को तुरंत दूर करना होगा।
लगातार तीन शून्य के बाद अभिषेक पर दबाव
सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा इस टूर्नामेंट में अभी तक खाता भी नहीं खोल पाए हैं। लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट होने के बाद उन पर दबाव बढ़ गया है।
धीमी पिचों पर स्पिन के खिलाफ भारतीय शीर्ष क्रम संघर्ष करता नजर आया है। बाएं हाथ के दो ओपनर होने के कारण ऑफ स्पिनरों को मदद मिल रही है। कोच Gautam Gambhir ने अभ्यास सत्र के दौरान अभिषेक से लंबी चर्चा की। वहीं गेंदबाजी कोच Morne Morkel ने कहा कि टीम को उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है और वह नेट्स में गेंद को अच्छी तरह हिट कर रहे हैं।
तिलक का स्ट्राइक रेट बना चिंता का कारण
नंबर तीन पर बल्लेबाजी कर रहे तिलक वर्मा ने चार मैचों में 106 रन जरूर बनाए हैं, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 120.45 रहा है, जो उनके करियर स्ट्राइक रेट 141.8 से काफी कम है।
पाकिस्तान के खिलाफ 25 रन (24 गेंद)
नामीबिया के खिलाफ 25 रन (21 गेंद)
नीदरलैंड के खिलाफ 31 रन (27 गेंद)
उन्हें अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन वह किसी भी मैच में बड़ी पारी नहीं खेल पाए। सुपर 8 में अगर यही रफ्तार रही तो भारत को मुश्किल हो सकती है।
धीमी पिचों पर अटकी बल्लेबाजी
न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भारतीय टीम ने 200 से ज्यादा के बड़े स्कोर बनाए थे, लेकिन विश्व कप में धीमी पिचों ने बल्लेबाजों की परीक्षा ली है।
अभिषेक की तेज बैट स्विंग रुककर आती गेंदों पर तालमेल नहीं बैठा पा रही है। भारत ने अब तक सिर्फ नामीबिया के खिलाफ 200 से अधिक रन बनाए हैं। ऐसे में ईशान किशन और कप्तान Suryakumar Yadav जैसी जिम्मेदार पारियों की जरूरत होगी, जिन्होंने पहले चरण में टीम को संभाला था।
गेंदबाजी बनी सबसे बड़ी ताकत
भले ही बल्लेबाजी सवालों के घेरे में हो, लेकिन गेंदबाजी भारत की बड़ी ताकत रही है। हर मैच में किसी न किसी गेंदबाज ने जिम्मेदारी निभाई है। हालांकि सुपर 8 में अब हर खिलाड़ी को सामूहिक प्रदर्शन करना होगा। केवल एक खिलाड़ी के दम पर जीत की उम्मीद जोखिम भरी हो सकती है।
सुपर 8 में क्या सुधार जरूरी?
पावरप्ले में स्थिर और आक्रामक शुरुआत
नंबर तीन पर बेहतर स्ट्राइक रेट
धीमी पिचों के अनुसार बल्लेबाजी में बदलाव
सामूहिक जिम्मेदारी
अगर भारत को खिताब बचाना है तो ग्रुप चरण की गलतियों से सीख लेकर सुपर 8 में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।