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मेलबर्न: चेतेश्वर पुजारा 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर काफी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन भारतीय कप्तान विराट कोहली का मानना है कि सौराष्ट्र का यह बल्लेबाज टीम की जरूरतों के अनुसार ‘अपने खेल में बदलाव का लचीलापन’ दिखा रहा है जिससे इस बार उन्हें सफलता मिली।  

पुजारा के पास मैच पर काबू करने की ताकत 
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पुजारा 2014-15 सत्र में दक्षिण अफ्रीका, इग्लैंड, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया दौरे पर काफी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजदा टेस्ट श्रृंखला के तीन मैचों में दो शतक की बदौलत वह 328 अंक के साथ शीर्ष बल्लेबाज हैं। कोहली ने कहा, ‘पुजारा तेजी से अपने खेल में बदलाव लाने को लेकर काफी अधिक लचीलापन दिखा रहे है। पिछली बार ऑस्ट्रेलिया दौरे की तुलना में उसने अपने खेल में कुछ बदलाव किए हैं जो उसके लिए अच्छा काम कर रहे हैं। वह इस चीज को स्वीकार कर रहा है कि अगर उसे कुछ कहा गया है तो उसे उन चीजों पर काम करना होगा, वह उन चीजों पर काम कर रहा है।’ 

टीम में पुजारा की भूमिका अहम
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भारत के पास किसी भी हालात में 20 विकेट चटकाने वाला गेंदबाजी आक्रमण है और ऐसे में पुजारा की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा, ‘अब हमारे पास ऐसा गेंदबाजी आक्रमण है जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं कि वह हमें 20 विकेट दिलाएगा और ऐसे में उसकी (पुजारा) भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर वह एक छोर संभाले रखता है और बाकी अन्य बल्लेबाज सकारात्मक बल्लेबाजी करते हैं तो हम आस्ट्रेलिया के हालात में 350 या 400 के करीब रन बना सकते हैं जो हमें नतीजा हासिल करने के लिए काफी अच्छी स्थिति में पहुंचा देगा।’
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भारत 1977-78 के बाद ऑस्ट्रेलिया में पहली बार किसी टेस्ट श्रृंखला में दो टेस्ट जीतने में सफल रहा है लेकिन कप्तान कोहली टीम के प्रदर्शन से हैरान नहीं हैं। भारत ने 41 साल पहले बिशन सिंह बेदी की अगुआई में ऑस्ट्रेलिया में दो टेस्ट जीते थे लेकिन टीम ने श्रृंखला 2-3 से गंवाई थी। कप्तान ने पदार्पण कर रहे मयंक अग्रवाल की धैर्यपूर्ण पारी और हनुमा विहारी के सलामी बल्लेबाज के रूप में ठोस प्रदर्शन की भी तारीफ की। कोहली ने साथ ही बताया कि रविचंद्रन अश्विन काफी अच्छी तरह चोट से उबर रहे हैं और सिडनी में तीन जनवरी से शुरू हो रहे चौथे और अंतिम टेस्ट से पूर्व उनके पूर्ण फिटनेस के करीब पहुंचने की उम्मीद है।

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