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स्पोर्ट्स डेस्क : ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) अनुबंध से बाहर होने के कारण 1.53 मिलियन डाॅलर के भुगतान का दावा ठोका था। इस मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। दरअसल, विरोधी वकीलों ने स्टार्क के पैर की चोट अचानक हुई घटना करार नहीं दिया। स्टार्क आईपीएल 2018 के दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स टीम का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने टांग में चोट की बात कही थी जिस कारण उन्हें 11वें एडिशन से बाहर होना पड़ा था। इस कारण स्टार्क को 1.53 मिलियन डाॅलर से हाथ धोना पड़ सकता है। 

बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान की फ्रेंचाइजी वाली केकेआर ने स्टार्क को साल 2018 में 1.8 मिलियन डाॅलर में खरीदा था। हालांकि स्टार्क को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान चोट लग गई और वह आईपीएल 11 से बाहर हो गए। इसके बाद स्टार्क ने लॉयड्स ऑफ लंदन के एक सिंडिकेट के खिलाफ विक्टोरियन काउंटी कोर्ट में मुकदमा दायर करने के लिए कार्यवाही की। लॉयड्स ऑफ लंदन (इंशोरेंस कम्पनी) का प्रतिनिधित्व करते हुए क्लाइड और सह वकीलों ने इस बात से इनकार किया है कि ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज को 10 मार्च को नीति के अनुसार चोट लगी थी।

इस दौरान यह दावा किया गया कि मिशेल स्टार्क की चोट दुर्घटनाओं की एक श्रृंखला के संचय का परिणाम थी जो 10 मार्च से पहले लगी थी। वहीं इस बारे में स्टार्क की तरफ से कहा गया था कि यह चोट अचानक या अप्रत्याशित नहीं थी। स्टार्स ने कहा है कि 10 मार्च 2018 को ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरे टेस्ट के दौरान उनके चोट लगी थी। उनके ऑस्ट्रेलियाई टीम के डॉक्टर रिचर्ड शॉ ने भी अपने बयान में यही कहा। 

गौर हो कि इस 30 वर्षीय खिलाड़ी को कोलकाता नाइट राइडर्स ने नवम्बर 2018 में रिलीज कर दिया था। स्टार्क वर्ल्ड कप 2019 के कारण आईपीएल 2019 में दिखाई नहीं दिए। इस बाद उन्होंने आईपीएल 2020 नीलामी में अपना नाम दिया। उनके साथी तेज गेंदबाज पैट कमिंस स्टार्क के फैसले के सबसे बड़े लाभार्थी थे, क्योंकि उन्हें केकेआर ने 15.5 करोड़ रुपए की भारी राशि के साथ खरीदा था। 

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