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नई दिल्ली ( निकलेश जैन ) कहते है की किसी भी देश का भविष्य उसकी आने वाली पीढ़ी पर निर्भर करता है।   भारतीय शतरंज टीम का भविष्य कहे जा रहे दुनिया के सबसे युवा ग्रांड मास्टरों मे शामिल 15 वर्षीय आर प्रग्गानंधा और 16 वर्षीय निहाल सरीन नें भारतीय शतरंज टीम को पहला शतरंज ओलंपियाड स्वर्ण पदक जीतने मे खास भूमिका अदा की , विश्व शतरंज संघ द्वारा जूनियर खिलाड़ियों को टीम मे शामिल करने का सबसे बड़ा फायदा भारत को ही हुआ । दोनों खिलाड़ियों नें मिलकर पूरे टूर्नामेंट मे भारत के लिए 13 मैच मे 10.5 अंक बनाए और एक बेहद परिपक्व खिलाड़ी की तरह खेले ।  आइये देखते है कैसा रहा इन दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन ।

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बात करे प्रग्गानंधा की तो ग्रुप चरण मे वह टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी बनाकर उभरे और 5 मे से 5 अंक बनाकर उन्होने चीन के खिलाफ जीत मे बड़ी भूमिका निभाई । सेमी फाइनल मे पोलैंड के खिलाफ वह एक बाजी हारे तो फाइनल मे रूस के खिलाफ उन्होने बाजी ड्रॉ खेली कुल मिलाकर उन्होने 7 मैच से टीम के लिए 5.5 अंक जुटाये

प्रग्गानंधा नें कहा

“मुझे बेहद खुशी है की मैं इस टीम का हिस्सा हूँ विश्वनाथन आनंद और अन्य सभी सीनियर के साथ खेलना एक सपना था ,कप्तान विदित गुजराती और उपकप्तान श्रीनाथ नारायणन नें मुझे बहुत सहयोग किया और जिस तरह से हमें प्रशंसको को प्यार मिला वह असाधारण था “

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निहाल सरीन की बात करे तो ग्रुप चरण मे निहाल नें 4 मैच खेलकर दो जीते दो ड्रॉ खेले जबकि क्वाटर फाइनल मे उन्होने अर्मेनिया के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत दर्ज की तो पोलैंड के खिलाफ भी सेमी फाइनल मे वह जीते जबकि फाइनल मे रूस के खिलाफ उनकी बाजी रद्द हुई तो उस लिहाज से देखे तो निहाल पूरे टूर्नामेंट मे अविजित रहे और कुल 6 मैच खेलकर 5 अंक बनाए ।

निहाल नें कहा

मैं अपनी पूरी टीम को इस असाधारण उपलब्धि के लिए बधाई देता हूँ ,हमारी टीम मे हर किसी नें शानदार शतरंज खेला और हम जीत के हकदार थे ,मेरे लिए सम्मान की बात है की मैं महान खिलाड़ियों से भरी इस टीम का हिस्सा बन सका खासतौर आनंद जी का टीम मे होना एक सपना है ,

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