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नई दिल्ली : प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डायना इडुल्जी ने सोमवार को विरोध जताया लेकिन इसके बावजूद कपिल देव की अगुआई वाली समिति को हितों के टकराव मामले में 2-1 से पाक साफ करार दिया गया। इसके साथ ही इनके द्वारा भारतीय पुरुष टीम के कोच की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया। इडुल्जी का नजरिया समिति के अध्यक्ष विनोद राय और एक अन्य सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) रवि थोडगे से मेल नहीं खाता था।

सीओए की बैठक के बाद इडुल्जी ने कहा, ‘यह फैसला (मेरे खिलाफ) 2-1 से था। मैंने कहा कि इसे आचरण अधिकारी (डीके जैन) के पास भेजा जाना चाहिए जिससे कि हितों के टकराव पर फैसला हो सके। तदर्थ समिति संविधान में नहीं है। इस तरह मैंने विरोध जताया।' कपिल देव की अगुआई वाली नई तदर्थ क्रिकेट सलाहकार समिति के दो अन्य सदस्य अंशुमन गायकवाड़ और शांता रंगास्वामी हैं। इस समिति ने महिला कोच का भी चयन किया था और इडुल्जी ने समिति के गठन और डब्ल्यूवी रमन की नियुक्ति को गैरकानूनी बताते हुए इसका विरोध किया था।

इडुल्जी ने एक बार फिर तदर्थ समिति की नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठाए हैं जिसके संदर्भ में उन्होंने दावा किया है कि यह सीओए के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इडुल्जी ने कहा, ‘यह फैसला करना सीओए के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि कौन हितों के टकराव के दायरे में है और कौन नहीं। यह काम आचरण अधिकारी को करना है। मैं अपने पूर्व के रुख पर कायम हूं (जब रमन की नियुक्ति की गई थी)। तदर्थ समिति कोच नहीं चुन सकती। यह संविधान में नहीं है।' 

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