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नई दिल्ली ( निकलेश जैन ) 64 खानो के खेल शतरंज में आज भारत नें एक नया मुकाम हासिल कर लिया । दिल्ली के रहने वाले पृथु गुप्ता भारत के 64 वे ग्रांडमास्टर बन गए । इसके साथ ही 64 खानो के इस खेल में भारत नें एक नया इतिहास रच दिया ।भारत के सबसे पहले ग्रांड मास्टर बने थे 1987 में विश्वनाथन आनंद ।

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आनंद नें 1987 में विश्व जूनियर शतरंज चैम्पियन बनकर ग्रांड मास्टर की उपाधि हासिल की थी हालांकि की आनंद नें यह उपाधि 18 वर्ष की उम्र में हासिल की और उसके बाद कभी 
पीछे मुड़कर नहीं देखा और 5 बार विश्व शतरंज चैम्पियन बने उनके बाद बंगाल के दिव्येंदु बरुआ ,महाराष्ट्र के प्रवीण थिप्से और अभिजीत कुंटे नें यह क्रम आगे बढ़ाया । खैर 1987 से लेकर 2016 तक भारत में 29 सालो में 41 ग्रांड मास्टर बने पर असली तेजी आई 2016 के बाद से और मात्र 2.5 सालो में ही भारत में 23 नए ग्रांड मास्टर बने जिनमें कई इतिहास बने ।  दूसरा सबसे कम उम्र के ग्रांड मास्टर बने इसी वर्ष जनवरी में 12 वर्षीय डी गुकेश ,तो पिछले वर्ष 13 वर्ष की आयु में प्रग्गानंधा तो 14 वर्ष की आयु में निहाल सरीन नें यह कारनामा कर दिखाया । 
अब 15 साल के पृथु गुप्ता नें यह ख़िताब हासिल करते हुए भारत के नाम एक और गौरव जोड़ा है। 

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तमिलनाडू का रहा बड़ा योगदान - विश्वनाथन आनंद चेन्नई तामिलनाडु से आते है और भारत की इस सफलता मे इस राज्य का प्रभाव भी बड़ा ही रहा । भारत के कुल 64 ग्रांड मास्टरों में तमिलनाडू नें अकेले 23 ग्रांड मास्टर देश को दिये । 
जबकि उसके बाद बंगाल से 8 , महाराष्ट्र से 7 तो दिल्ली अकेले नें देश को 6 ग्रांड मास्टर दिये । आंध्र प्रदेश से 4 ,केरला , तेलंगना और कर्नाटका से 3 -3 तो उड़ीसा और गुजरात से 2-2 खिलाड़ी ग्रांड मास्टर बने । जबकि राजस्थान , हरयाणा और गोवा से 1 -1 खिलाड़ी ग्रांड मास्टर बने । 

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