Sports

जयपुर : आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप अपने जबरदस्त क्रिकेट के लिए दुनिया भर का ध्यान खींचता है, लेकिन इस टूर्नामेंट का जयपुर से एक ऐसा कनेक्शन भी है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं, जहां यह मशहूर ट्रॉफी बनाई गई थी। जयपुर के ट्रॉफी डिजाइनर अमित पाबूवाल ने कहा कि टूर्नामेंट के लिए ट्रॉफी उन्होंने तब बनाई थी जब ऑस्ट्रेलिया की मिनाले ब्राइस ने शुरुआती डिजाइन कॉन्सेप्ट तैयार किया था। इतना ही नहीं जीतने वाली टीम को असली ट्रॉफी नहीं बल्कि उसकी जगह हू-ब-हू  तैयार की गई ट्रॉफी मिलती है। 

पाबूवाल ने कहा कि ट्रॉफी का डिजाइन आउटलाइन 2007 में तैयार किया गया था जिस साल आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप का पहला एडिशन हुआ था। इसके बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने उन्हें ट्रॉफी बनाने का काम सौंपा। उन्होंने PTI को बताया, 'एक बार डिजाइन आउटलाइन फाइनल हो जाने के बाद आईसीसी ने मुझे ट्रॉफी बनाने का काम सौंपा। इस तरह 2007 में आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाई गई थी।' पाबुवाल ने कहा कि उन्होंने पहले क्रिकेट के लिए दुनिया की सबसे बड़ी सिल्वर 'फ्रेंडशिप कप' ट्रॉफी डिजाइन की थी, जिसने सबका ध्यान खींचा और आखिरकार आईसीसी ने टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी के लिए उनसे संपर्क किया। 

उन्होंने कहा, 'आईसीसी ने शुरू में टाइटेनियम और ग्लास के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल करके ट्रॉफी बनाने का प्लान बनाया था ताकि डिजाइन टी20 क्रिकेट के तेज और मॉडर्न स्टाइल को दिखाए। कई प्रोटोटाइप तैयार किए गए, लेकिन मेटल स्ट्रक्चर के साथ इंटीग्रेट करते समय ग्लास के पार्ट्स बार-बार टूट जाते थे जिससे इस कॉन्सेप्ट को टेक्निकली लागू करना मुश्किल हो गया। कई एक्सपेरिमेंट के बाद, मैंने सलाह दी कि यह कॉम्बिनेशन टेक्निकली काम नहीं करेगा।' 

उन्होंने कहा कि फाइनल वर्जन प्लैटिनम प्लेटिंग के साथ सिल्वर का बना था जिससे यह टिकाऊ और इंटरनेशनल टूर्नामेंट के लिए सही था। पाबुवाल ने आगे कहा कि ओरिजिनल ट्रॉफी आईसीसी हेडक्वार्टर में ही रहती है जबकि जीतने वाली टीम को वैसी ही एक रेप्लिका मिलती है। उन्होंने कहा कि ट्रॉफी लगभग 21 इंच लंबी है, इसका वजन लगभग 6 किलोग्राम है और यह प्लैटिनम प्लेटिंग के साथ सिल्वर से बनी है।