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नई दिल्ली: न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में ऐतिहासिक हार के बाद भारतीय टीम और हेड कोच गौतम गंभीर पर सवालों का दौर जारी है। इसी बीच टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर और गौतम गंभीर के साथ लंबे समय तक केकेआर में खेलने वाले रॉबिन उथप्पा ने बड़ा सुझाव देते हुए स्प्लिट-कोचिंग मॉडल अपनाने की वकालत की है।

न्यूज़ीलैंड के हाथों सीरीज़ गंवाना भारत के लिए कई मायनों में चौंकाने वाला रहा। यह पहली बार था जब कीवी टीम ने भारत में कोई वनडे सीरीज जीती और इंदौर के होल्कर स्टेडियम में भारत की पहली वनडे हार भी इसी सीरीज में दर्ज हुई।

गंभीर पर बढ़ा दबाव, उथप्पा ने छेड़ी नई बहस

लगातार निराशाजनक नतीजों के बाद गौतम गंभीर एक बार फिर आलोचनाओं के घेरे में हैं। इसी कड़ी में रॉबिन उथप्पा ने अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग कोच नियुक्त करने के विचार को सामने रखा।

उथप्पा का मानना है कि भारत जैसे देश, जो साल भर हर फॉर्मेट में क्रिकेट खेलता है, वहां एक ही कोच पर सभी फॉर्मेट का बोझ डालना सही नहीं है।

“माइंडसेट को ताज़ा रखने के लिए जरूरी है बदलाव”

अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान उथप्पा ने कहा, 'केक काटने के कई तरीके होते हैं। मैं अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग कोच रखने के विचार के लिए पूरी तरह खुला हूं। भारत बहुत ज्यादा क्रिकेट खेलता है। एक फॉर्मेट से दूसरे फॉर्मेट में जाते वक्त दिमाग भी थक जाता है।'

उन्होंने आगे कहा कि जब कोई कोच एक फॉर्मेट में पूरी तरह डूबा होता है, तो दूसरे फॉर्मेट की तैयारी करना मुश्किल हो जाता है। 'ऐसे में फ्रेश माइंडसेट और नई एनर्जी जरूरी होती है। इस नजरिए से स्प्लिट-कोचिंग काम कर सकती है।'

“फैसला आसान नहीं, तालमेल सबसे अहम”

हालांकि उथप्पा ने यह भी साफ किया कि स्प्लिट-कोचिंग लागू करना आसान फैसला नहीं होगा। 'यह आसान कॉल नहीं है। सभी कोचों का एक-दूसरे के साथ तालमेल में काम करना बेहद जरूरी है। अगर वे आपस में टकराएंगे, तो नुकसान टीम का ही होगा।'

उन्होंने कहा कि लगातार संवाद, सही समय पर नेतृत्व और पीछे हटने की समझ बेहद जरूरी है। 'यह तभी संभव है जब सोच किसी बड़ी और मजबूत संरचना को बनाने की हो।'

T20I सीरीज में खुद को साबित करने का मौका

वनडे में झटकों के बाद अब गौतम गंभीर और टीम इंडिया की नजरें टी20 फॉर्मेट पर होंगी। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20I सीरीज 21 जनवरी से शुरू हो रही है, जो T20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारत की आखिरी द्विपक्षीय सीरीज़ होगी। टी20 में अच्छा प्रदर्शन न सिर्फ टीम का आत्मविश्वास बढ़ाएगा, बल्कि गंभीर पर बने दबाव को भी कम कर सकता है।