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भोपाल : मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण विभाग में कथित तौर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने के मामले की जांच पुलिस की अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईडी) कर रही है। सीआईडी सूत्रों ने रविवार को यहां बताया कि विभाग की ओर से कुछ समय पहले दो शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ये शिकायत फर्जी दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के आधार पर विभाग में नौकरी पाने से संबंधित हैं। मुख्य रूप से ये शिकायत राज्य लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की ओर से जिला खेल अधिकारियों (डीएसओ) की नियुक्तियों से जुड़ी हुई हैं।

सूत्रों ने शिकायत के हवाले से कहा कि प्रारंभिक तौर पर चार जिला खेल अधिकारियों की नियुक्तियों में गड़बड़ियां नजर आती हैं। बताया गया है कि इन अभ्यर्थियों ने खेल संबंधी जो प्रमाणपत्र लगाए हैं, वे फर्जी हैं। इस संबंध में अब गहरायी से जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अभ्यर्थियों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने ठीक ढंग से नहीं किया। इस संबंध में मुख्य रूप से संयुक्त संचालक स्तर के एक अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सूत्रों ने कहा कि इन शिकायतों की जांच एक पखवाड़े के अंदर पूरी होने की संभावना है। इसके बाद आगे विधिवत कारर्वाई की जाएगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग में ये नियुक्तियां पिछले दो वर्ष के दौरान हुयी हैं।

वहीं इस संबंध में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री जीतू पटवारी ने यूनीवार्ता से कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जितने भी अनियमितता संबंधी मामले सामने आए हैं, वे पूर्ववर्ती सरकार के हैं। अभी उनके सामने ये प्रकरण नहीं आया है। वे इसे भी दिखवाएंगे। पटवारी ने कहा कि इसके पहले भी अनियमितताएं संबंधी जितने प्रकरण उनके सामने आए, सभी की जांच करवायी जा रही है। सरकार खेल के क्षेत्र में गंदगी बर्दाश्त नहीं करेगी, क्योंकि खेलों से सामान्यत: मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चे ही जुड़ते हैं और उन्हें पर्याप्त संसाधन मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है। 

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