स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली की वनडे फॉर्म में वापसी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में खेली गई उनकी प्रभावशाली पारी ने साबित कर दिया कि कोहली अब भी बड़े मौकों के खिलाड़ी हैं। इस बीच, पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने कोहली की बल्लेबाज़ी को लेकर एक दिलचस्प और गहरा नजरिया पेश किया है। अश्विन के मुताबिक, यह वापसी किसी तकनीकी बदलाव की नहीं, बल्कि मानसिक आजादी और खेल के आनंद की कहानी है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पारी जिसने बहस को जन्म दिया
वडोदरा में खेले गए पहले वनडे में विराट कोहली ने 91 गेंदों में 93 रनों की शानदार पारी खेली। वह अपने 85वें अंतरराष्ट्रीय शतक से महज सात रन दूर रह गए, लेकिन उनकी पारी भारत के 301 रन के सफल लक्ष्य को हासिल करने की नींव बन गई। 2023 के बाद पहली बार 90 के दशक में आउट हुए कोहली ने दिखा दिया कि उनकी क्लास और मैच अवेयरनेस अब भी शीर्ष स्तर पर है।

अश्विन का साफ संदेश: तकनीक नहीं, सोच बदली है
अपने यूट्यूब शो में बात करते हुए आर अश्विन ने कहा कि विराट कोहली ने अपनी बल्लेबाजी में कोई तकनीकी बदलाव नहीं किया है। अश्विन के अनुसार, फर्क सिर्फ इतना है कि कोहली अब बिना किसी मानसिक बोझ के खेल रहे हैं। अश्विन ने कहा कि जब खिलाड़ी अपने खेल का आनंद लेने लगता है और दिमाग पूरी तरह शांत होता है, तभी वह इस स्तर की निरंतरता दिखा पाता है। उनके मुताबिक, कोहली अब अपने अनुभव को बचपन की बेफिक्री के साथ जोड़कर बल्लेबाज़ी कर रहे हैं।
मानसिक मजबूती बनी वापसी की असली वजह
अश्विन का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी के करियर के इस पड़ाव पर परफॉर्मेंस पूरी तरह मानसिक स्थिति पर निर्भर होती है। कोहली इस समय अपनी ज़िंदगी और क्रिकेट दोनों में सही जगह पर नज़र आ रहे हैं। यही कारण है कि दबाव भरे मौकों पर भी उनकी बल्लेबाज़ी में स्पष्टता और आत्मविश्वास दिखाई देता है।
आंकड़े भी कहानी बयां करते हैं
अक्टूबर 2025 में प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी के बाद से विराट कोहली ने सात वनडे मैचों में 463 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 93.8 रहा है, जिसमें दो शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। खास बात यह है कि उनका स्ट्राइक रेट 106 से ऊपर रहा, जो यह दिखाता है कि वह सिर्फ टिक नहीं रहे, बल्कि आधुनिक वनडे की मांग के मुताबिक आक्रामक भी रहे।

नई सोच के साथ आक्रामक शुरुआत
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कोहली की वनडे बल्लेबाज़ी में एक नई सोच दिख रही है। वह अब पारी की शुरुआत से ही सकारात्मक और आक्रामक अप्रोच अपनाते हैं, ताकि बाकी बल्लेबाज़ों पर से दबाव कम हो। न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच के बाद कोहली ने खुद कहा कि वह अब माइलस्टोन के बारे में नहीं सोचते, बल्कि टीम को जीत की स्थिति में ले जाना उनकी प्राथमिकता है।
घरेलू क्रिकेट में भी दिखी झलक
दिसंबर में विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान दिल्ली के लिए खेलते हुए कोहली ने 131 रन की शतकीय पारी और 77 रन का अर्धशतक जड़ा था। 16 साल बाद इस टूर्नामेंट में वापसी करते हुए उनका प्रदर्शन यह साफ कर गया था कि उनकी लय पूरी तरह लौट चुकी है।
2027 वर्ल्ड कप पर टिकी नजर
अब 37 साल के विराट कोहली का लक्ष्य साफ है 2027 वनडे वर्ल्ड कप। मौजूदा फॉर्म और मानसिक स्पष्टता को देखते हुए, वह आने वाले मैचों में भी टीम इंडिया के लिए अहम भूमिका निभाने को तैयार दिख रहे हैं।