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कोलंबो : दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर हर्शल गिब्स को लगता है कि आईसीसी स्पर्धाओं में सफलता हासिल करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटरों को मजबूत मानसिकता के साथ आगे बढऩा होगा। गिब्स ने कहा- अगले साल भारत में टी-20 विश्व कप होना है ऐसे में दक्षिण अफ्रीकी खिलाडिय़ों के लिए विंंडीज खिलाडिय़ों को हराना आसान नहीं होगा। उन्हें वह सिर्फ मजबूत मानसिकता के साथ हरा सकते हैं।

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लंका प्रीमियर लीग में कोच के रूप में तैयार गिब्स ने कहा- इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के हाल ही में संपन्न 13वें संस्करण में एक बार फिर दक्षिण अफ्रीकी खिलाडिय़ों जैसे क्विंटन डी कॉक, कागिसो रबाडा और एनरिक नार्जे के कुछ गुणवत्ता प्रदर्शन देखने को मिले। लेकिन गिब्स का मानना है कि समस्या कभी भी प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों के साथ नहीं रही है। कोलंबो किंग्स के मुख्य कोच ने कहा- दक्षिण अफ्रीका हमेशा विश्व स्तरीय खिलाडिय़ों का उत्पादन करता है। लेकिन यह बड़े मैच का स्वभाव है और उस दबाव से निपटना जो वर्षों से कमी की स्थिति में है।

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एलपीएल में गिब्स शुरू में कमेंट्री के लिए आए थे। लेकिन बाद में वह टीम के कोच बन गए। भूमिका बदलने पर उन्होंने कहा- ठीक है, भाग्य  एक दिलचस्प मोड़ लेकर आया है। मुझे पता चला कि डेव व्हाटमोर, जिसे पहले कोलंबो किंग्स का कोच नामित किया गया था, कुछ व्यक्तिगत कारणों के कारण आ नहीं पाए हैं। इसलिए जब मुझसे संपर्क किया गया, तो मैंने मना नहीं किया।

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गिब्स ने 2006 में 111 गेंदों में 175 रनों की अपनी तूफानी पारी पर भी बात की। उन्होंने कहा- यह किसी भी खिलाड़ी के लिए हमेशा इस बात का मार्गदर्शन होगा कि किस तरह स्कोर का पीछा किया जाता है। गिब्स ने कहा-आप उस तरह की दस्तक को नहीं भूल सकते और वह भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ। यह बल्लेबाजी करने के लिए एक अच्छा विकेट था और ऑस्ट्रलियाई ने हमें कोई विकल्प नहीं दिया। इसके बाद सिर्फ हिटिंग ही हुई। यह वास्तव में टी-20 की तरह था, हम 19 वें ओवर में 150 पर पहुंच गए थे।

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