स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच-विनर्स में शुमार युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के पीछे की असली वजह का खुलासा किया है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने यह बड़ा बयान टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के साथ एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान दिया।
2019 वर्ल्ड कप से बाहर होना बना टर्निंग पॉइंट
युवराज सिंह ने जून 2019 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया था। यह फैसला उस वक्त आया, जब उन्हें 2019 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। उच्च दबाव वाले मुकाबलों में भारत को जीत दिलाने वाले इस वर्ल्ड कप हीरो के लिए यह झटका उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
‘मैं क्रिकेट एन्जॉय नहीं कर पा रहा था’
सानिया मिर्जा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान युवराज ने खुलकर स्वीकार किया कि करियर के आखिरी दौर में उनका मानसिक संतुलन और मोटिवेशन टूट चुका था।
युवराज ने कहा, 'मैं अपना गेम एन्जॉय नहीं कर रहा था। मेरे मन में बार-बार यही सवाल आता था कि मैं क्रिकेट क्यों खेल रहा हूं, जब मुझे खुशी ही नहीं मिल रही। मुझे न तो सपोर्ट महसूस हो रहा था और न ही सम्मान।'
सम्मान की कमी ने बढ़ा दी मानसिक पीड़ा
युवराज ने आगे बताया कि लगातार यह महसूस होना कि उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके वे हकदार थे, उनके लिए बेहद तकलीफदेह था।
उन्होंने कहा, 'मैं सोचता था कि जब सम्मान ही नहीं है, तो मुझे खुद को क्यों तकलीफ देनी चाहिए? मैं क्या साबित करना चाहता हूं? मैं मानसिक और शारीरिक रूप से इससे ज्यादा नहीं कर सकता था और यह मुझे अंदर से चोट पहुंचा रहा था।'
‘संन्यास के बाद मैं फिर से खुद बन पाया’
युवराज सिंह ने यह भी माना कि संन्यास लेने के बाद उन्हें एक अलग तरह की मानसिक शांति मिली।
उन्होंने कहा, 'जिस दिन मैंने क्रिकेट छोड़ा, उसी दिन मैं फिर से खुद बन पाया।' 2011 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे युवराज को लगा कि उन्होंने देश के लिए जो करना था, वह कर चुके हैं और अब खुद के लिए फैसला लेने का वक्त आ गया है।
नवजोत सिंह सिद्धू की टिप्पणी और पिता योगराज सिंह का रिएक्शन
बातचीत के दौरान युवराज ने अपने शुरुआती दिनों का एक अहम किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में नवजोत सिंह सिद्धू ने उनके खेल को लेकर संदेह जताया था।
युवराज बोले, 'मैं इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेता, लेकिन मेरे पिता ने इसे बहुत व्यक्तिगत तौर पर लिया।' युवराज के पिता योगराज सिंह, जो अपने सख्त और अनुशासित रवैये के लिए जाने जाते हैं, ने इस टिप्पणी को अपने बेटे की ट्रेनिंग का ईंधन बना लिया। यही कड़ाई और जिद आगे चलकर युवराज सिंह को एक संदेहास्पद किशोर से भारत के सबसे बड़े मैच-विनर में बदलने की नींव बनी।
‘आज पीछे देखता हूं तो अलग नजरिया मिलता है’
युवराज ने कहा, 'अब पीछे देखता हूं तो लगता है कि शायद सिद्धू जी के पास मुझे ठीक से देखने का वक्त नहीं था। वह उस समय भारत के लिए खेल रहे थे और मैं सिर्फ 13–14 साल का बच्चा था, जो अभी खेल को समझ रहा था।'