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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेटर एस श्रीसंत पर साल 2013 में आईपीएल फिक्सिंग मामले में फंसने के बाद उन पर आजीवन बैन लगा दिया गया था। लेकिन हाईकोर्ट द्वारा इस पूरे मामले को देखने के बाद बीसीसीआई ने उन पर पर कम कर दिया था जो अब साल 2020 में खत्म होगा। हाल ही में एक इंटरव्यू में बात करते हुए श्रीसंत ने बताया कि किस तरह वह इन सबसे डिप्रेशन का शिकार हो गए थे और उनके मन में कई बार आत्महत्या का ख्याल भी आया। 

एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान श्रीसंत ने तिहाड़ में गुजारे अपने 26 दिनों की याद को ताजा करते हुए उस अनुभव को सांझा किया। उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आने के अगले 6 महीने तक वह डिप्रेशन का शिकार हो गए थे और जेल से बाहर आने के बाद उन्हें खास तौर पर थेरेपी भी लेनी पड़ी। उन्होंने कहा, 'मैं रात भर सो नहीं पाता था और मैं बिना बात के रो पड़ता था। 4-5 बार तो मेरे मन में खुद को खत्म करने का ख्याल आया लेकिन खुद को रोक लिया। 

श्रीसंत ने कहा कि वह जेल में रहते हुए अक्सर सोचते थे कि यह सब कैसे हो गया। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं सोचता था कि मेरे साथ क्यों हुआ बल्कि ये सोचता था कि ऐसा कैसे हो सकता है। क्या मैंने कभी कुछ गलत किया जिस कारण मेरे साथ यह सब हो रहा है। लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला।' श्रीसंत ने कहा, डिप्रेशन से बाहर निकलने में संगीत ने मेरी मदद की और मैंने जेल में हमेशा जलते रहने वाले बल्ब पर 'रोशनी' नामक गाना भी लिखा था। 

फिलहाल श्रीसंत क्रिकेट से दूर हैं और राजनीति और एक्टिंग से जुड़ चुके हैं। उन्होंने फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट और उनकी बेटी पूजा भट्ट के साथ एक वेबसीरीज पर काम करने की बात कही है। इसी के साथ ही वह अपनी ऑटोबायोग्राफी पर भी काम रहे हैं। राजनीति पर बात करते हुए कहा कि वह बीजेपी के टिकट पर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं। 

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