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नयी दिल्ली : भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में बदलाव (उन्नयन) किया है, जिसके मुताबिक राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण के लिये आने से पहले खिलाड़ियों को 15 दिनों तक खुद को पृथकवास में रहना होगा। साइ की ओर से पहले से जारी एसओपी में मंगलवार को इस निर्देश को जोड़ा गया। 

साइ के सचिव रोहित भारद्वाज की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति ने मई में देश भर में खेल गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए एसओपी तैयार किया था। जिसके मुताबिक पांच महीने के बाद राष्ट्रीय शिविरों में मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और बैडमिंटन में अभ्यास को फिर से शुरू किया गया है।

साइ से जारी बयान के मुताबिक-  नया (उन्नयन) एसओपी साइ द्वारा पहले जारी एसओपी की अगली कड़ी है। इसमें प्रशिक्षण शिविरों में शामिल होने वाले खिलाड़ियों के संबंध में प्रक्रियात्मक बदलाव किये गये हैं। इस एसओपी के नियम उन लोगों पर लागू होंगे जो अब या बाद में शिविर में शामिल होंगे।

इससे पहले (मई में) जारी साइ के एसओपी में कम वेंटीलेशन वाले चेंजिंग रूम हटाये जाने, ट्रेनिंग उपकरणों को इस्तेमाल के बाद हर बार संक्रमण रहित करना, शिफ्ट में जिम के इस्तेमाल के अलावा ‘स्पारिंग’ पर प्रतिबंध शामिल था।

नये एसओपी का मुख्य पहलू परीक्षण और पृथकवास से संबंधित है। साइ ने कहा कि वह प्रशिक्षण शिविरों में शामिल होने से पहले एथलीटों, कोचों और सहायक कर्मचारियों के किए जाने वाले सभी कोविड-19 परीक्षणों के खर्च का वहन करेगा।

साइ ने कहा- सभी एथलीटों, कोचों और सहायक कर्मचारियों को साइ केंद्रों की यात्रा करने से 96 घंटे पहले कोविड-19 के लिए आरटी-पीसीआर जांच करानी होगी। उन्हें जांच में नेगेटिव रिपोर्ट पेश करने के बाद ही केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति होगी। बयान के मुताबिक- अगर एथलीट, कोच या सहयोगी सदस्य यात्रा करने से पहले अपरिहार्य कारणों से जांच कराने में असमर्थ है, तो केंद्र पहुंचने के तुरंत बाद उनका आरटी-पीसीआर परीक्षण किया जाएगा। शिविर में पहुंचने के बाद कोचों और खिलाड़ियों को एक सप्ताह तक अनिवार्य रूप से पृथकवास में रहना होगा।

उन्होंने बताया- पृथकवास अवधि के छठे दिन कोविड-19 जांच में नेगेटिव आने वाले खिलाड़ियों और कोचों को ही खेल गतिविधियां शुरु करने की इजाजत होगी। उन्होंने कहा- कोई भी एथलीट, कोच, सहयोगी सदस्य अगर कोविड-19 पॉजिटिव पाया जाता है, तो भारत सरकार, राज्य सरकार, साइ एसओपी और स्थानीय निकायों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाएगा।

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