स्पोर्ट्स डेस्क : टी20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले साउथ अफ्रीका के विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया का ध्यान खींच लिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे T20I में डी कॉक ने न सिर्फ तूफानी शतक जड़ा, बल्कि साउथ अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा टी20 रन बनाने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। यह पारी बताती है कि डी कॉक टूर्नामेंट से पहले अपने करियर के बेहतरीन दौर में हैं।
फाफ डु प्लेसिस का रिकॉर्ड पीछे छूटा
क्विंटन डी कॉक अब साउथ अफ्रीका के T20 क्रिकेट में सबसे सफल रन-स्कोरर बन चुके हैं। उन्होंने फाफ डु प्लेसिस के लंबे समय से चले आ रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अपने करियर में 430 T20 मैचों में डी कॉक ने 12,113 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 31.46 और स्ट्राइक रेट 139 से अधिक का रहा है। आठ शतक और 81 अर्धशतक यह साबित करते हैं कि वह सिर्फ़ आक्रामक ही नहीं, बल्कि बेहद निरंतर बल्लेबाज भी हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ तूफानी शतक
29 जनवरी को सेंचुरियन के सुपरस्पोर्ट पार्क में खेले गए दूसरे T20I में डी कॉक ने वेस्ट इंडीज़ के गेंदबाज़ों की जमकर खबर ली। उन्होंने सिर्फ़ 43 गेंदों में शतक पूरा किया और 49 गेंदों पर 115 रनों की विस्फोटक पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से छह चौके और 10 लंबे छक्के निकले। यह साउथ अफ्रीका के लिए T20I में तीसरा सबसे तेज़ शतक भी रहा।
पावर और टाइमिंग का शानदार मेल
डी कॉक की बल्लेबाज़ी में उस दिन ताक़त और तकनीक का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। उन्होंने सिर्फ़ 21 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और इसके बाद गियर बदलते हुए गेंदबाज़ों पर दबाव बना दिया। चाहे तेज़ गेंदबाज़ हों या स्पिनर, डी कॉक ने सभी के खिलाफ पुल, कट और स्लॉग-स्वीप जैसे शॉट्स से रन बटोरे। रोस्टन चेज़, जेसन होल्डर और जेडन सील्स तक कोई भी उन्हें रोक नहीं पाया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए ऐतिहासिक जीत
डी कॉक की पारी की बदौलत साउथ अफ्रीका ने 223 रनों के बड़े लक्ष्य को सिर्फ़ 17.3 ओवर में हासिल कर लिया। टीम ने सात विकेट से शानदार जीत दर्ज की और एक मैच बाकी रहते हुए सीरीज़ में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। यह रन चेज़ साउथ अफ्रीका की T20 इतिहास की सबसे प्रभावशाली जीतों में गिना जाएगा।
अकील होसेन के खिलाफ चरम पर हमला
डी कॉक का आक्रमण खासतौर पर अकील होसेन के ओवर में चरम पर पहुंचा, जब उन्होंने लगातार बड़े शॉट लगाकर स्टेडियम को झुमा दिया। अंत में वह भले ही मिड-ऑफ पर कैच आउट हो गए, लेकिन तब तक मैच पूरी तरह साउथ अफ्रीका की पकड़ में आ चुका था। दर्शकों का स्टैंडिंग ओवेशन उनकी पारी की गुणवत्ता को साफ दर्शा रहा था।