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बेंगलुरु : भारतीय पुरुष हॉकी टीम के डिफेंडर बीरेंद्र लाकड़ा का कहना है कि प्रतियोगिता नहीं होने पर खुद को प्रेरित रखना काफी महत्वपूर्ण है।लाकड़ा के लिए वो समय काफी कठिन था जब 2016 में रियो ओलंपिक से पहले उन्हें घुटने में चोट लग गई थी और उन्हें ओलंपिक से बाहर होना पड़ा था। उन्होंने बताया कि ऐसे वक्त में खुद को प्रेरित रखना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। 

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लाकड़ा ने कहा कि जब मैं 2016 में चोटिल हुआ तो मैं इस बात से चिंतित था कि क्या मैं दोबारा खेल पाऊंगा। लेकिन हॉकी इंडिया ने मेरा अच्छा इलाज कराया जिसके कारण मैं आठ-दस महीनों के बाद प्रतिस्पर्धी हॉकी में वापसी कर सका। लेकिन इस महामारी के कारण कोई प्रतियोगिता नहीं होने पर मुझे वो दिन याद आ रहा है जब मैंने खुद को प्रेरित रखा था।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति ऐसी है जो हम लोगों में से किसी ने नहीं देखी है लेकिन एक एथलीट होने के नाते हमें सकारात्मक रहना होगा और खुद को प्रेरित रखना होगा। जब मैं चोटिल था तो मुझे काफी परेशानी होती थी और मैं ज्यादातर चीजें नहीं कर पाता था। मैं दूसरों पर निर्भर था और साथी खिलाड़ियों को मैच खेलते देखता था लेकिन खुद नहीं खेल पा रहा था। यह मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन उस दौर ने मुझे लॉकडाउन की चुनौतियों से पार पाने में मदद की।

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