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नई दिल्ली : भारतीय ओलिम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय पुरूष और महिला हॉकी टीम के बर्मिंघम में अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों (सी.डब्ल्यू.जी.) में भाग लेने की संभावना बेहद कम है क्योंकि वे एशियाई खेलों के दौरान अपनी शीर्ष फार्म में रहना चाहेंगी जो 2024 पेरिस ओलिम्पिक के लिए क्वालीफायर टूर्नामेंट है। बत्रा ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को यहां एक औपचारिक बैठक के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के महानिदेशक संदीप प्रधान को इस बात से अवगत करा दिया है।

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अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के प्रमुख और हॉकी इंडिया के पूर्व अध्यक्ष बत्रा ने कहा कि भारतीय हॉकी टीम की प्राथमिकता एशियाई खेलों में अपने शिखर (लय और फिटनेस) पर पहुंचना है, जो राष्ट्रमंडल खेलों के ठीक 35 दिन बाद शुरू होगा। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन 28 जुलाई से आठ अगस्त तक होना है जबकि एशियाई खेलों की मेजबानी चीन का हांग्जो 10 से 15 सितंबर तक करेगा।

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हॉकी इंडिया में प्रभुत्व रखने वाले बत्रा ने कहा कि हॉकी इंडिया के साथ मेरी प्रारंभिक चर्चा के आधार पर अब इस बात की संभावना कम है कि भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम राष्ट्रमंडल खेलों 2022 में भाग लेगी। उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया यह नहीं चाहेगा कि उसके खिलाड़ी एशियाई खेलों 2022 से 35 दिन पहले अपने खेल के शीर्ष पर पहुंचे। उसकी कोशिश होगी की खिलाडिय़ों की लय और फिटनेस एशियाई खेलों के समय शीर्ष पर रहे।

उन्होंने कहा कि 2022 में राष्ट्रमंडल खेल चीन में एशियाई खेलों से ठीक 35 दिन पहले हैं और हॉकी में एशियाई खेलों का विजेता सीधे 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लेगा। इसलिए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना पुरुष और महिला हॉकी टीम दोनों के लिए जरूरी है।

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गोल्ड कोस्ट (2018) राष्ट्रमंडल में भारत का प्रतिनिधित्व खिलाडिय़ों के 216 सदस्यीय दल द्वारा किया गया था, जहां देश ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और इतने ही कांस्य पदक हासिल किया था। भारत कुल 66 पदक के साथ तालिका में तीसरे स्थान पर रहा था। बर्मिंघम खेलों से निशानेबाजी और तीरंदाजी को पहले ही हटा दिया गया है और अब हॉकी टीम के बाहर होने की संभावना है, ऐसे में आगामी खेलों में भारतीय दल बहुत छोटा होगा।

बत्रा ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों 2022 के लिए भारतीय दल में खिलाडिय़ों की संख्या 2018 की तुलना में बहुत कम होगी। इसमें 36 हॉकी खिलाडिय़ों के साथ निशानेबाजी और तीरंदाजी के खिलाड़ी भी शामिल नहीं होगें। लगभग 18 निशानेबाज और 8 तीरंदाजों को मिलाकर 2018 की तुलना में 62 खिलाड़ी कम हो गए। उन्होंने कहा कि इसके कारण 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पदकों की संख्या भी पहले की तुलना में कम होगी।

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