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नई दिल्ली : हाकी ओलंपियन और 1975 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य अशोक दीवान यात्रा संबंधित पांबदियों के कारण अमेरिका में फंसे हुए हैं और भारत वापसी के लिये उनकी मदद की गुहार पर खेल मंत्रालय ने गुरूवार को प्रयास शुरू कर दिए हैं। उनके स्वास्थ्य में लगातार हो रही गिरावट और परेशानी का कारण बनी हुई है। 65 साल के दीवान ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा को फोन करके अनुरोध किया कि उच्च अधिकारियों से इस बाबत बात करें।

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि खेलमंत्री किरेन रीजीजू को पत्र मिल गया है और उन्होंने इसे विदेश मंत्रालय को सौंप दिया है। सूत्र ने कहा, ‘खेल मंत्रालय ने संबंधित अधिकारियों से हालात की समीक्षा करके इस मामले पर फैसला लेने को कहा है।’ दीवान ने अंतरराष्ट्रीय हाकी महासंघ (एफआईएच) के प्रमुख बत्रा को लिखा, ‘मुझे आपकी मदद चाहिए क्योंकि मैं अमेरिका में फंसा हूं और मुझे स्वास्थ्य संबंधित परेशानी हो रही हैं। मुझे पिछले हफ्ते कैलिफोर्निया में अस्पताल में आपात स्थिति में जाना पड़ा था। मैं इन दिनों अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं और साथ ही यहां बीमा भी नहीं है। यहां चिकित्सीय खर्चा काफी महंगा है।’ 

उन्होंने कहा, ‘पहले मुझे 20 अप्रैल को एयर इंडिया से स्वदेश लौटना था लेकिन इस महामारी से पैदा हुए हालात के कारण यात्रा की तारीखों को आगे करना पड़ा।’ दीवान ने कहा, ‘मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहता हूं कि मेरी मदद के लिए इस संदेश को खेल मंत्री और विदेश मंत्री को फारवर्ड कर दें कि वे मेरे चेक-अप के लिये अस्पताल का इंतजाम करवा सकें या फिर सान फ्रांसिसको से भारत के लिये जल्दी रवानगी का इंतजाम करवा दें।’ वर्ष 1975 विश्व कप विजेता टीम के नायक ने साथ ही कहा कि वे भारत लौटने के बाद अपने सारे बिलों का भुगतान कर देंगे।

उन्होंने कहा, ‘कृपया इसे अत्यावश्यक के तौर पर देखिये क्योंकि यहां मेरा स्वास्थ्य सचमुच काफी खराब है।’ भारत की 1976 ओलंपिक टीम के सदस्य दीवान अपने बेटे साथ समय बिताने के लिये पिछले साल दिसंबर में साक्रेमेंटो गये थे। दीवान की बेटी आरूषी ने कहा, ‘मेरे पिता दिसंबर में अमेरिका गये थे और उन्हें 20 अप्रैल को लौटना था। वह मेरे भाई से मिलने के लिये अकेले गये थे जिसकी शादी नहीं हुई और वह वहां काम करता है। लेकिन अचानक वह बीमार पड़ गये और उन्हें उच्च रक्तचाप और तनाव की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाना पड़ा। पता चला कि उन्हें हृदय संबंधी परेशानी है। डाक्टरों ने उन्हें एक महीने की दवाई दी है लेकिन इससे उन्हें फायदा नहीं हो रहा है।’ 

 

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