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नई दिल्ली: वसीम जाफर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय दिग्गज इस प्रारूप में कुछ समय और खेल सकते थे। पूर्व ओपनर के मुताबिक, संन्यास से पहले कोहली के साथ हुए व्यवहार से वह निराश नजर आ रहे थे। कोहली ने 12 मई 2025 को 14 साल के टेस्ट करियर को अलविदा कहा था।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने कोहली की टेस्ट क्रिकेट से विदाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि कोहली इस प्रारूप में कुछ समय और खेल सकते थे और उनका संन्यास अपेक्षाकृत जल्दी हो गया। जाफर ने यह भी संकेत दिया कि चयन प्रक्रिया के दौरान कोहली के साथ हुए व्यवहार से वह नाखुश नजर आ रहे थे।

वसीम जाफर ने कोहली के टेस्ट संन्यास पर क्या कहा?

वसीम जाफर ने अपने यूट्यूब चैनल पर विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के घटनाक्रम पर बात की। उन्होंने कहा कि कोहली के फैसले के पीछे चयनकर्ताओं के साथ उनके संबंधों और उस समय के माहौल की भूमिका हो सकती है। हालांकि, कोहली ने अपने संन्यास के पीछे की पूरी वजह सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं बताई है। ऐसे में जाफर की टिप्पणी को उनके व्यक्तिगत आकलन के रूप में देखा जाना चाहिए।

जाफर ने कहा, 'ऐसा लगा कि विराट के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उससे वह थोड़े नाराज थे।' उनके इस बयान ने एक बार फिर उस समय को लेकर चर्चा तेज कर दी है, जब कोहली ने मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। जाफर का मानना है कि भारतीय बल्लेबाज अपने करियर को इस प्रारूप में कुछ और आगे बढ़ा सकते थे।

'विराट जैसे खिलाड़ी और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे'

जाफर ने विराट कोहली के प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता और टेस्ट क्रिकेट में उनके योगदान का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, कोहली जैसे खिलाड़ी की मौजूदगी मैदान पर दर्शकों को आकर्षित करती है और टीम को भी अनुभव मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि संन्यास के फैसले की वास्तविक वजह तब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी, जब तक कोहली खुद इस बारे में विस्तार से बात नहीं करते।

पूर्व भारतीय ओपनर ने कहा, 'विराट जैसे खिलाड़ी लोगों को मैदान तक खींचकर लाते हैं। उनकी लोकप्रियता बहुत ज्यादा है। वह निश्चित रूप से और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते थे। जब तक हम खुद विराट के मुंह से यह बात नहीं सुनते, तब तक हमें पूरी सच्चाई नहीं पता चलेगी। वह इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे।'

मई 2025 में कोहली ने टेस्ट क्रिकेट को कहा था अलविदा

विराट कोहली ने 12 मई 2025 को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। इसके साथ ही उनका 14 साल लंबा टेस्ट करियर समाप्त हो गया, जिसमें उन्होंने 123 मुकाबले खेले। कोहली ने अपने टेस्ट करियर में 9,230 रन बनाए, उनका बल्लेबाजी औसत लगभग 46.85 रहा। इस दौरान उन्होंने 30 शतक और सात दोहरे शतक लगाए, जिससे वह भारत के सबसे सफल टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल हुए।

कोहली के संन्यास की घोषणा ऐसे समय हुई थी, जब भारतीय टीम को कुछ ही सप्ताह बाद इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने के लिए रवाना होना था। उनसे पहले रोहित शर्मा ने भी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। लगातार दो वरिष्ठ खिलाड़ियों की विदाई ने भारतीय टेस्ट टीम के सामने नेतृत्व और बल्लेबाजी संयोजन को नए सिरे से तैयार करने की चुनौती खड़ी कर दी थी।

भारतीय टेस्ट क्रिकेट में कोहली का कप्तानी रिकॉर्ड रहा शानदार

विराट कोहली का योगदान केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं रहा। वह भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में से एक हैं। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 68 टेस्ट मैचों में 40 जीत दर्ज कीं, जो किसी भारतीय कप्तान के नाम सबसे ज्यादा टेस्ट जीत का रिकॉर्ड है। उनके नेतृत्व में टीम ने फिटनेस, आक्रामकता और तेज गेंदबाजी पर विशेष जोर दिया, जिससे विदेशी परिस्थितियों में भी भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ।

कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने लगातार दो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में जगह बनाई। उनके कार्यकाल को भारतीय टेस्ट क्रिकेट में प्रतिस्पर्धात्मक रवैये और विदेशी धरती पर जीत की मानसिकता को मजबूत करने के दौर के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनके संन्यास ने टीम के लिए एक महत्वपूर्ण युग का अंत कर दिया। कोहली के साथ रोहित शर्मा और इससे पहले रविचंद्रन अश्विन की विदाई ने भारतीय टेस्ट टीम में बदलाव की प्रक्रिया को और तेज किया।

इंग्लैंड दौरे से पहले संन्यास ने बढ़ाए थे सवाल

कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले ने कई प्रशंसकों को चौंका दिया था। खास बात यह थी कि उन्होंने उसी साल दिल्ली की ओर से रणजी ट्रॉफी मुकाबले में भी हिस्सा लिया था, जिसे लाल गेंद के क्रिकेट के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा गया। उस समय ऐसी चर्चा थी कि वह इंग्लैंड दौरे की तैयारी कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने दौरे से पहले टेस्ट क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया।

मीडिया रिपोर्टों में उस समय के चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के साथ हुई बातचीत को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि टीम में युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने और प्रदर्शन के आधार पर चयन करने की दिशा में बदलाव हो रहा था। हालांकि, कोहली के संन्यास के पीछे इन परिस्थितियों की वास्तविक भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस फैसले को केवल चयनकर्ताओं के साथ मतभेद का परिणाम मानना सही नहीं होगा।

क्या कोहली टेस्ट क्रिकेट में और खेल सकते थे?

वसीम जाफर की टिप्पणी ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट को कुछ और समय दे सकते थे। एक पक्ष का मानना है कि उनका अनुभव, बल्लेबाजी क्षमता और दर्शकों के बीच लोकप्रियता भारतीय टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती थी। दूसरी ओर, टीम में नए खिलाड़ियों को अवसर देने और भविष्य की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद सीमित ओवरों के क्रिकेट में खेलना जारी रखा है और इंडियन प्रीमियर लीग में भी सक्रिय हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में वापसी की संभावना को खारिज किया है। ऐसे में जाफर का बयान मुख्य रूप से संन्यास के समय और उससे पहले के घटनाक्रम पर चर्चा को दोबारा सामने लाता है। फिलहाल, इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी कोहली के अपने विस्तृत बयान के बिना स्पष्ट नहीं कही जा सकती।