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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली ने एक बार फिर मैदान के साथ-साथ मैदान के बाहर भी फैंस का दिल जीत लिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के बाद कोहली ने अपने करियर, परिवार और क्रिकेट को लेकर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर में जीती गई सभी ट्रॉफियां गुरुग्राम में रहने वाली अपनी मां को भेज दी हैं। यह फैसला सिर्फ उपलब्धियों का नहीं, बल्कि भावनाओं और आभार से जुड़ा है। 

28,000 इंटरनेशनल रन: कोहली ने रचा नया इतिहास

न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में विराट कोहली ने इंटरनेशनल क्रिकेट में 28,000 रन पूरे कर लिए। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले सबसे तेज खिलाड़ी बने। कोहली ने यह मुकाम अपनी 624वीं पारी में हासिल किया, जबकि सचिन तेंदुलकर ने 644 और कुमार संगकारा ने 666 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था। इस रिकॉर्ड के साथ कोहली इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

“यह सफर किसी सपने के सच होने जैसा है”

मैच के बाद विराट कोहली ने अपने पूरे करियर को याद करते हुए कहा कि उनका सफर किसी सपने से कम नहीं रहा। उन्होंने माना कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन भगवान और फैंस से मिले प्यार ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ाया। कोहली के मुताबिक, क्रिकेट के जरिए लोगों के चेहरों पर खुशी और मुस्कान लाना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।

ट्रॉफियां मां को भेजने की असली वजह

विराट कोहली ने मुस्कुराते हुए बताया कि उन्होंने अपनी सभी ट्रॉफियां अपनी मां को भेज दी हैं, जो गुरुग्राम में रहती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मां को अवॉर्ड्स और ट्रॉफियां अपने पास रखना बेहद पसंद है। कोहली के लिए यह सिर्फ सम्मान की बात नहीं, बल्कि उस महिला के प्रति कृतज्ञता है जिसने उनके पूरे सफर में हर कदम पर साथ दिया। 

दबाव में भी शांत, माइलस्टोन से दूर सोच

न्यूजीलैंड के खिलाफ 91 गेंदों में 93 रन की मैच जिताऊ पारी पर बात करते हुए कोहली ने कहा कि वह अब माइलस्टोन के बारे में नहीं सोचते। उनका फोकस सिर्फ मैच की स्थिति और टीम को जीत दिलाने पर रहता है। चेज़ के दौरान उन्होंने हालात के मुताबिक खेलते हुए आक्रामक और संयमित बल्लेबाजी का संतुलन बनाए रखा।

बदली हुई सोच, वही क्लास

कोहली ने स्वीकार किया कि अब वह पारी की शुरुआत में पहले से ज्यादा सकारात्मक और आक्रामक सोच के साथ उतरते हैं। नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए वह सिर्फ हालात के हिसाब से रुकने के बजाय जरूरत पड़ने पर काउंटर-अटैक करना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि सही गेंदों पर भरोसा दिखाकर विपक्षी टीम को दबाव में लाना गेम का रुख बदल देता है।

भीड़ का प्यार और ड्रेसिंग रूम का पल

रोहित शर्मा के आउट होने के बाद जब कोहली बल्लेबाजी के लिए आए, तो स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। हालांकि कोहली ने माना कि आउट होकर लौट रहे खिलाड़ी के लिए ऐसा माहौल थोड़ा अजीब हो सकता है। उन्होंने कहा कि फैंस का उत्साह समझ में आता है, लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर उनका ध्यान सिर्फ अपनी जिम्मेदारी पर रहता है।