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स्पोर्ट्स डेस्क : महिला क्रिकेट तेजी से बदल रहा है। खेल की रफ्तार, खिलाड़ियों की ताकत और दर्शकों की दिलचस्पी तीनों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसी बदलते परिदृश्य के बीच न्यूजीलैंड की कप्तान और अनुभवी ऑलराउंडर सोफी डिवाइन ने मौजूदा फील्डिंग नियमों और बाउंड्री के आकार को लेकर अहम सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां बल्लेबाजों के पक्ष में अत्यधिक झुकी हुई हैं, जिससे गेंदबाजों के लिए संतुलन बनाना मुश्किल हो गया है। डिवाइन की यह टिप्पणी महिला क्रिकेट में संभावित सुधारों पर एक नई बहस को जन्म दे सकती है। 

फील्डिंग नियमों पर दोबारा विचार की जरूरत

फिलहाल महिला क्रिकेट में नॉन-पावरप्ले ओवरों के दौरान इनर सर्कल के बाहर सिर्फ चार फील्डर रखने की अनुमति है। यह नियम ज्यादा रन और बाउंड्री को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि, सोफी डिवाइन का मानना है कि खेल अब उस स्तर तक पहुंच चुका है जहां इस नियम की समीक्षा जरूरी हो गई है। डिवाइन के अनुसार, बल्लेबाजों की पावर और शॉट-मेकिंग क्षमता में जिस तरह का इजाफा हुआ है, उसे देखते हुए बाहर पांच फील्डर रखने की इजाजत देने से खेल की प्रतिस्पर्धा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

छोटी बाउंड्री से गेंदबाजों पर बढ़ता दबाव

महिला प्रीमियर लीग (WPL) में बाउंड्री की अधिकतम लंबाई 60 मीटर तय की गई है, जबकि पुरुष क्रिकेट में यह दूरी 70 से 77 मीटर तक होती है। डिवाइन का मानना है कि छोटी बाउंड्री और सीमित फील्डिंग विकल्पों का मेल गेंदबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि खासकर सपाट पिचों पर गेंदबाजों के पास गलती की गुंजाइश बेहद कम रह जाती है, क्योंकि हल्की सी चूक भी आसानी से बाउंड्री में तब्दील हो जाती है।

बल्लेबाजों के पक्ष में झुका संतुलन

डिवाइन ने स्वीकार किया कि आधुनिक महिला क्रिकेट में बल्लेबाजों की ताकत और आक्रामकता काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन मौजूदा नियमों के कारण खेल का संतुलन एकतरफा होता जा रहा है। उनके मुताबिक, अगर गेंदबाजों को मुकाबले में बनाए रखना है तो फील्डिंग सेटअप और बाउंड्री डाइमेंशन दोनों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

WPL में शानदार फॉर्म में सोफी डिवाइन

WPL 2026 की नीलामी में गुजरात जायंट्स द्वारा खरीदी गई सोफी डिवाइन इस सीजन बेहतरीन लय में नजर आ रही हैं। वह टूर्नामेंट के टॉप रन-स्कोरर्स और विकेट-टेकरों में शामिल हैं। व्यक्तिगत सफलता के बावजूद, उन्होंने गेंदबाजों की चुनौतियों पर खुलकर बात की, जो उनके अनुभव और खेल की समझ को दर्शाता है।

‘रिटायर्ड-आउट’ रणनीति पर डिवाइन की राय

डिवाइन ने WPL में ‘रिटायर्ड-आउट’ रणनीति के बढ़ते इस्तेमाल पर भी अपनी राय रखी। हाल के मैचों में इस फैसले को लेकर बहस छिड़ी है, लेकिन डिवाइन का मानना है कि अगर यह कदम टीम के हित में और रणनीतिक रूप से उठाया जाए तो यह पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय का मकसद टीम को मोमेंटम देना और मैच की स्थिति का सही फायदा उठाना होना चाहिए।

इम्पैक्ट प्लेयर से बेहतर विकल्प?

डिवाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मिड-मैच सब्स्टीट्यूशन वाले इम्पैक्ट प्लेयर नियम की तुलना में ‘रिटायर्ड-आउट’ विकल्प को ज्यादा पसंद करती हैं। उनके मुताबिक, यह नियम खिलाड़ियों को अपनी स्किल दिखाने का पूरा मौका देता है और फिर भी टीम संतुलन बनाए रख सकती है।