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बैंकॉक : भारतीय बैडमिंटन टीम रविवार से शुरू हो रहे थॉमस और उबेर कप फाइनल में उतरेगी तो नजरें दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू और विश्व चैम्पियनशिप कांस्य पदक विजेता लक्ष्य सेन पर रहेंगी। भारत की किसी पुरूष टीम ने अभी तक थॉमस कप में पदक नहीं जीता है। एक बार भी टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सके। महिला टीम 2014 और 2016 में उबेर कप सेमीफाइनल में पहुंचकर कांस्य पदक जीती है। 

पिछले साल दोनों टीमें क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी। इस बार भारतीय पुरूष टीम में दुनिया के नौवे नंबर के खिलाड़ी सेन, 11वें नंबर के किदाम्बी श्रीकांत और 23वीं रैंकिंग वाले एच एस प्रणय हैं। युगल में दुनिया की नौवें नंबर की जोड़ी सात्विक साइराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के अलावा एम आर अर्जुन और ध्रुव कपिला तथा के पी गारागा और विष्णुवर्धन गौड़ की जोड़ी भी है। मजबूत टीम और अनुकूल ड्रॉ मिलने से भारतीय पुरूष टीम के पास पहली बार पदक जीतने का सुनहरा मौका है। भारत को ग्रुप सी में पहला मुकाबला जर्मनी से खेलना है जबकि चीनी ताइपै और कनाडा भी ग्रुप में हैं। 

महिला टीम में युगल में एन सिक्की रेड्डी और अश्विनी पोनप्पा की अनुभवी टीम नहीं है और प्रतिभाशाली गायत्री गोपीचंद को नाम वापिस लेना पड़ा। सिक्की और गायत्री दोनों चोटिल हैं। उनकी गैर मौजूदगी में तनीषा क्रास्टो, श्रुति मिश्रा, सिमरन सिंघी, रितिका ठाकेर और त्रिसा जौली पर जिम्मेदारी होगी। महिला एकल में दुनिया की सातवें नंबर की खिलाड़ी सिंधू के साथ आकर्षि कश्यप और उन्नति हुड्डा जैसे अनुभवहीन खिलाड़ी हैं। दोनों हालांकि कड़े ट्रायल के बाद चुने गए हैं और बेहद प्रतिभाशाली हैं। 

ग्रुप डी में भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, अमेरिका और कनाडा है। कुल 16 टीमों को चार चार के समूह में बांटा गया है और हर समूह से शीर्ष दो टीमें नाकआउट खेलेंगी। पुरूष वर्ग में चीनी ताइपै भारत के लिये सबसे कठिन प्रतिद्वंद्वी है तो महिला वर्ग में दक्षिण कोरिया। भारत के पूर्व कोच विमल कुमार ने कहा, ‘हमारे पास इस बार थॉमस कप जीतने का सबसे सुनहरा मौका है। हमारे पास अच्छे एकल और युगल खिलाड़ी हैं और अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन करने पर वे सर्वश्रेष्ठ को हरा सकते हैं। महिला टीम के लिये चुनौती हालांकि मुश्किल है।' 

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