नई दिल्ली: भारत के अनुभवी घरेलू क्रिकेटर श्रेयस गोपाल ने दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में अपने करियर की बड़ी उपलब्धि हासिल की। साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे फाइनल में मैदान पर उतरते ही श्रेयस ने 100 फर्स्ट-क्लास मैच पूरे कर लिए।
इस खास उपलब्धि को उन्होंने बेहद गर्व और खुशी का पल बताया। कर्नाटक के अनुभवी खिलाड़ी ने अपने लंबे करियर के सफर को याद करते हुए परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का शुक्रिया अदा किया।
'100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलना बेहद अविश्वसनीय है'
श्रेयस गोपाल ने बीसीसीआई डोमेस्टिक द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में अपने 100वें फर्स्ट-क्लास मैच को लेकर कहा: '100वां फर्स्ट-क्लास मैच खेलना काफी अविश्वसनीय है और दलीप ट्रॉफी का फाइनल इसे और भी खास बना देता है।'
उन्होंने अपने बचपन के सपने को याद करते हुए कहा: 'जब आप एक बच्चे के रूप में बड़े हो रहे होते हैं, तो आप अपने राज्य के लिए कुछ मैच खेलने का सपना देखते हैं। लेकिन आप वास्तव में अपने 100वें मैच के बारे में नहीं सोचते। इसलिए यह मेरे लिए बहुत खास एहसास है।'
उतार-चढ़ाव से भरा रहा श्रेयस का सफर
2013 में फर्स्ट-क्लास डेब्यू करने के बाद श्रेयस गोपाल ने अपने करियर में सफलता के साथ-साथ कई मुश्किल दौर भी देखे हैं। उन्होंने इस लंबे सफर को याद करते हुए कहा: 'पिछले कुछ वर्षों में बहुत सारी यादें हैं—अच्छी, खराब, परेशान करने वाली और खुशियों भरी। यह एक मिली-जुली भावना है, लेकिन यहां खड़े होकर अपना 100वां मैच खेलना मेरे लिए बहुत खुशी और गर्व की बात है।'
उन्होंने भारतीय परिस्थितियों में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलने की चुनौती को भी याद किया। 'पिछले कुछ वर्षों में यह एक अच्छा संघर्ष रहा है। भारतीय विकेटों पर आपने कुछ मुश्किल परिस्थितियों में खेला है और वहां से कुछ हासिल करने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ती है।'
कर्नाटक के साथ शुरू हुआ था करियर
श्रेयस गोपाल ने अपने फर्स्ट-क्लास करियर की शुरुआत कर्नाटक के साथ की थी। वह 2013-14 रणजी ट्रॉफी जीतने वाली कर्नाटक टीम का हिस्सा रहे और उस सीजन में उन्होंने 22 विकेट हासिल किए थे। इसके बाद 2023-24 सीजन में उन्होंने केरल का रुख किया। हालांकि, बाद में वह फिर कर्नाटक लौटे और 2024-25 के घरेलू सीजन में टीम को विजय हजारे ट्रॉफी जिताने में योगदान दिया।
'फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में लंबे समय तक टिकना सबसे मुश्किल काम है' श्रेयस ने बताया कि बचपन में उन्हें फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के लंबे सफर की कठिनाई के बारे में बताया गया था। उन्होंने कहा: 'जब आप फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में आते हैं, तो बचपन में मुझे एक बात बताई गई थी कि फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलना और इतने वर्षों तक टिके रहना सबसे मुश्किल चीज होगी।'
उन्होंने आगे कहा: 'अब जब मैं इस मुकाम पर खड़ा हूं, तो मुझे समझ आता है कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। यह चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन साथ ही यह बेहद संतोष देने वाला भी रहा है।'
अनुशासन और धैर्य को बताया सबसे बड़ी सीख
100 फर्स्ट-क्लास मैच पूरे करने के बाद श्रेयस गोपाल ने बताया कि इस सफर ने उन्हें सबसे बड़ी सीख अनुशासन और दृढ़ता की दी है। उन्होंने कहा: 'इस सफर ने मुझे सबसे बड़ी चीज अनुशासन और दृढ़ता सिखाई है। इनके बिना आप बहुत ज्यादा मैच नहीं खेल पाएंगे।'
परिवार, पत्नी और फैंस को समर्पित किया 100वां मैच
श्रेयस गोपाल ने अपनी इस उपलब्धि को अपने परिवार, माता-पिता, पत्नी, करीबी दोस्तों और उन सभी प्रशंसकों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके पूरे करियर में उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा: 'मैं अपने 100वें मैच की इस उपलब्धि को अपने परिवार, अपने माता-पिता और अपनी पत्नी को समर्पित करना चाहता हूं। निश्चित तौर पर अपने कुछ बेहद करीबी दोस्तों और उन प्रशंसकों व लोगों को भी, जिन्होंने मेरे पूरे सफर में मेरा समर्थन किया है।'
दलीप ट्रॉफी फाइनल में यादगार बना 100वां मैच
श्रेयस गोपाल के लिए 100वां फर्स्ट-क्लास मैच इसलिए भी खास है क्योंकि यह उपलब्धि उन्हें दलीप ट्रॉफी के फाइनल में हासिल हुई। घरेलू क्रिकेट में लंबे समय से सक्रिय श्रेयस ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई उतार-चढ़ाव देखे और अलग-अलग टीमों के लिए खेलते हुए अपनी पहचान बनाई। उनका 100वां फर्स्ट-क्लास मैच उनके करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसे उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और समर्थकों के साथ साझा किया।