स्पोर्ट्स डेस्क : भारत को तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन ने हाल ही में समाप्त हुए टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनकर एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। सैमसन पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) के पुरुष या महिला वर्ग के किसी टूर्नामेंट में अपनी टीम के चार मैच नहीं खेलने के बावजूद ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का पुरस्कार जीता है।
शुरुआत में नहीं मिला था टीम में मौका
टूर्नामेंट की शुरुआत में सैमसन रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें शुरुआती मुकाबलों में अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली। बीच में अभिषेक शर्मा के अस्वस्थ होने के कारण उन्हें एक मैच खेलने का मौका मिला, लेकिन इसके बाद उन्हें फिर टीम से बाहर बैठना पड़ा।
सुपर-8 के बाद मिला मौका और बदल गई कहानी
सुपर-8 चरण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बड़ी हार के बाद भारतीय टीम ने अपने शीर्ष क्रम में बदलाव किया। बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता को देखते हुए टीम मैनेजमेंट ने दाएं हाथ के बल्लेबाज संजू सैमसन को मौका दिया। केरल के इस बल्लेबाज ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार शानदार पारियां खेलीं।
नॉकआउट मुकाबलों में दिखाया दम
सैमसन ने वेस्टइंडीज के खिलाफ क्वार्टर फाइनल जैसे अहम मुकाबले में नाबाद 97 रन की पारी खेली। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 रन बनाए और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में भी 89 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
केवल 5 मैच खेलकर रचा इतिहास
भारत ने इस टूर्नामेंट में कुल 9 मैच खेले, लेकिन सैमसन इनमें से सिर्फ 5 मुकाबलों में ही मैदान पर उतरे। इसके बावजूद ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनने का कारनामा करने वाले वह पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
पहले इन खिलाड़ियों ने भी जीता था यह अवॉर्ड
इससे पहले आईसीसी टूर्नामेंट में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनने वाले खिलाड़ी या तो सभी मैच खेलते थे या सिर्फ एक मुकाबले से बाहर रहते थे।
इन खिलाड़ियों में
लिसा कीटली – महिला वनडे वर्ल्ड कप 2000
कारेन रोल्टन – महिला वनडे वर्ल्ड कप 2005
केविन पीटरसन – टी20 वर्ल्ड कप 2010
रचिन रवींद्र – चैंपियंस ट्रॉफी 2025 शामिल हैं, जिन्होंने अपनी टीम के एक-एक मैच नहीं खेलने के बावजूद यह सम्मान हासिल किया था।