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नई दिल्ली : भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने बुधवार को फैसला किया कि वह राष्ट्रीय खेल संस्था के लिए होने वाले चुनावों में शीर्ष पद के दूसरे कार्यकाल के लिए नहीं लड़ेंगे और उनके खिलाफ सार्वजनिक निधि में हेराफेरी के आरोप पर सीबीआई की प्राथमिक जांच शुरू करने के बाद यह घोषणा हुई है। 

बत्रा ने कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के प्रमुख के तौर पर और अधिक समय देने की आवश्यकता है। बत्रा 2017 में पहली बार आईओए अध्यक्ष चुने गए थे और वह दूसरी बार फिर से इस पद के लिए चुनाव लड़ने योग्य हैं। उनकी इस घोषणा का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की उनकी सदस्यता भी खत्म हो जाएगी क्योंकि यह पद उनकी आईओए अध्यक्षता से जुड़ा था। बत्रा को 2019 में आईओसी सदस्य बनाया गया था। आईओए के चुनाव पिछले साल दिसंबर में कराए जाने थे लेकिन अदालत में लंबित मामले के कारण इन्हें रोक दिया गया था। 

बत्रा ने एक बयान में कहा कि ऐसे वक्त में जब विश्व हॉकी विकास के दौर से गुजर रहा है जिसमें हॉकी फाइव्स का प्रोमोशन, इस साल नए टूर्नामेंट - एफआईएच हॉकी नेशन्स कप- और खेल प्रेमियों को लुभाने के लिए मंच लांच करना और इसी तरह की गतिविधियां शुरू करना शामिल हैं, तो इन गतिविधियों के लिए एफआईएच के अध्यक्ष के तौर पर मुझे और समय चाहिए होगा। परिणामस्वरूप, मैंने फैसला किया है कि मुझे आईओए अध्यक्ष के तौर पर अगले कार्यकाल के लिये चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। 

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