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नई दिल्ली : भारतीय महिला हॉकी टीम की युवा स्ट्राइकर लालरेम्सियामी ने कहा है कि कप्तान रानी और उपकप्तान सविता ने कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान ढाई महीने से अधिक समय बेंगलुरू के साइ सेंटर में रहने के दौरान खिलाडिय़ों का मनोबल बनाए रखा। भारतीय महिला टीम की सबसे युवा सदस्यों में से एक लालरेम्सियामी ने कहा- टीम में रानी या सविता जैसे सीनिया नहीं होते तो हमारे लिए इतने दिन होस्टल के कमरे में बिताना कठिन होता। उन्होंने हमारा मनोबल बनाए रखा।

मिजोरम की इस खिलाड़ी ने कहा- सबसे पहले जब मार्च में लॉकडाउन शुरू हुआ तो हमें हालात की गंभीरता समझ में ही नहीं आई लेकिन हमने नियमों का कड़ाई से पालन किया। इसके बाद टीम डॉक्टरों में से एक ने हमें महामारी के बारे में बताया और तब हमें पता चला कि यह कितना गंभीर मसला है।

उन्होंने कहा- सीनियर खिलाडिय़ों ने भी हमसे बात करके पूछा कि कोई समस्या तो नहीं है। उन्होंने हमें घर की कमी महसूस नहीं होने दी। वे हमें भारतीय टीम के साथ अपने अनुभव और रियो ओलंपिक के अनुभव बताते रहते थे जिससे हमें ओलंपिक खेलने की प्रेरणा मिली।

हॉकी इंडिया से एक महीने का ब्रेक मिलने के बाद लालरेम्सियामी इस समय अपने शहर कोलासिब में संस्थागत पृथकवास में है। उन्होंने कहा- पहले मैने सोचा कि नहीं जाऊं क्योंकि मिजोरम में 21 दिन का पृथकवास अनिवार्य है लेकिन मैं चार महीने से अपनी मां और परिवार से नहीं मिली हूं और एक बार जुलाई में बेंगलुरू जाने के बाद फोकस बस हॉकी पर रहेगा।

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