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नई दिल्ली :18 बार के ग्रैंड स्लेम विजेता और 1996 ओलंपिक में कांस्य पदक हासिल करने वाले भारत के लीजेंड टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने कहा है कि 1996 ओलंपिक के लिए उन्होंने अपनी शारीरिक मजबूती में परिवर्तन किया था और खुद को विशेष रूप से एकल मुकाबलों के लिए तैयार किया था।

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पेस भारत के पहले टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक हासिल किया था। उन्होंने 1996 में अटलांटा में हुए ओलंपिक में पुरुष एकल वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया था। उन्होंने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता स्क्वैश खिलाड़ी सौरभ घोषाल के साथ ‘‘द फिनिश लाइन’ शो में 1992 के बार्सीलोना ओलंपिक में हार और अगले ओलम्पिक के लिए अपनी तैयारियों में किए गए परिवर्तन के बारे में बात की।

पेस ने कहा- 1992 ओलंपिक में युगल वर्ग में जब मैं और रमेश कृष्णन क्वाटर्राफाइनल में हारे और हमने ओलंपिक पदक हासिल करने का मौका गंवाया तब मुझे एहसास हुआ कि रमेश संन्यास लेंगे और 1996 ओलंपिक में शामिल नहीं होंगे। मुझे यह भी एहसास हुआ कि ऐसा कोई युवा खिलाड़ी फिलहाल टीम में नहीं है जो अटलांटा में पदक जीत सकता है।

उन्होंने कहा- 1992 में मैं सिर्फ ओलंपिक में जगह बनाना चाहता था। दो घंटे 45 मिनट तक चले क्वाटर्रफाइनल मुकाबले में हारने और ओलंपिक पदक जीतने का मौका गंवाने के बाद मैं काफी देर बेंच पर बैठा रहा। मैंने अपनी ट्रेनिंग में बदलाव के बारे में सोचा और फैसला किया कि 1992-1996 के बीच एकल प्रतियोगिता के लिए अपनी शारीरिक और मानसिक मजबूती में परिवर्तन करुंगा।

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