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हुबली : इतिहास रचने के बाद जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा भावुक नजर आए। कर्नाटक के खिलाफ रणजी ट्रॉफी फाइनल ड्रॉ होने के बाद पहली पारी की बढ़त के आधार पर खिताब जीतने वाली टीम के कप्तान ने कहा कि इस जीत को बयान करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं।

“यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि”

डोगरा ने मैच के बाद कहा, 'सच कहूं तो मैं इसे समझा नहीं सकता। मेरे पास अभी कोई शब्द नहीं हैं। यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी चीज है और मैं इसके लिए बहुत शुक्रगुजार हूं।' उन्होंने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ और टीम के साथियों की जमकर तारीफ की।

'यह सिर्फ 11 या 15 खिलाड़ियों की बात नहीं है। पूरी टीम और सपोर्ट स्टाफ ने शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआत से ही हमें 100 प्रतिशत विश्वास था कि हम यह खिताब जीत सकते हैं।'

पहली पारी की 291 रन की बढ़त बनी निर्णायक

Jammu and Kashmir cricket team ने पहली पारी में 291 रन की विशाल बढ़त हासिल कर मुकाबले पर पकड़ बना ली थी। कर्नाटक के पास वापसी का एकमात्र मौका दूसरी पारी में जम्मू-कश्मीर को सस्ते में समेटना था। उन्होंने 11/2 पर झटका भी दिया, लेकिन इसके बाद कमरान इकबाल ने पारी को संभाल लिया।

कमरान और लोटरा ने बंद किए दरवाजे

कमरान इकबाल ने नई गेंद का डटकर सामना किया और पारस डोगरा व अब्दुल समद के साथ अहम साझेदारियां कीं। इसके बाद कमरान और साहिल लोटरा ने संयमित बल्लेबाजी से कर्नाटक की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार शतक जड़े। यह पारी उनके करियर की यादगार पारियों में शामिल रहेगी।

कप्तान का साहसिक फैसला

चौथे दिन के बाद मुकाबला उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन पांचवें दिन दूसरे सत्र में पारस डोगरा ने पारी घोषित करने का साहसिक फैसला लिया। इसके बाद दोनों टीमों ने ड्रॉ पर सहमति जताई और जम्मू-कश्मीर खिताब का हकदार बना।

ऐतिहासिक जीत का जश्न

यह जीत जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक क्षण है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एकजुटता और आत्मविश्वास दिखाया। डोगरा ने कहा कि अभी वह सिर्फ इस पल का जश्न मनाना चाहते हैं और आगे की योजनाओं पर बाद में विचार करेंगे।