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बेंगलुरु : भारतीय महिला हॉकी की उभरती स्टार 21 वर्षीय ज्योति सिंह ने साफ कहा है कि वह भारतीय हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय धावक की बेटी ज्योति का मानना है कि खेल उनके खून में रचा-बसा है।

पिता से मिली खेल की प्रेरणा

झांसी में जन्मी ज्योति ने बताया कि उनके पिता अंतरराष्ट्रीय एथलीट थे और बचपन से ही उन्हें खेल का माहौल मिला।

उन्होंने कहा, 'मैं पापा के साथ मैदान में दौड़ने और बैडमिंटन खेलने जाया करती थी। खेल हमेशा से मेरी जिंदगी का हिस्सा रहा है।'

जूनियर कप्तानी से सीनियर टीम तक का सफर

ज्योति ने महिला जूनियर विश्व कप में भारत की कप्तानी की। पिछले साल उन्होंने सीनियर टीम में पदार्पण किया और एफआईएच प्रो लीग के चार मुकाबलों में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत ने विश्व नंबर एक नीदरलैंड के खिलाफ भी जीत दर्ज की, जो उनके करियर का अहम पड़ाव रहा।

चचेरी बहन से मिली हॉकी की राह

ज्योति ने खुलासा किया कि उन्हें हॉकी खेलने की प्रेरणा अपनी चचेरी बहन से मिली, जो सीनियर अकादमी का हिस्सा थीं। 'जब भी वह गर्मियों की छुट्टियों में घर आती थीं, मैं उनके साथ समय बिताती थी और उनकी तरह बनना चाहती थी।'

ग्वालियर अकादमी ने बदली दिशा

करियर को नई दिशा देने के लिए ज्योति मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित महिला हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लेने पहुंचीं। यह फैसला उनके करियर के लिए निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि परिवार और कोच ने हमेशा उनका साथ दिया और उन पर कभी किसी तरह का दबाव नहीं बनाया।

खेलों से जुड़े परिवार का फायदा

ज्योति का मानना है कि खेलों से जुड़े परिवार में जन्म लेना उनके लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि उनके माता-पिता उनके संघर्ष और मेहनत को अच्छी तरह समझते हैं। अब उनका लक्ष्य भारतीय हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाना और देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करना है।