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नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम केपूर्व कप्तान सौरव गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष बन गए हैं लेकिन उनकी राह आसान नहीं होगी। दादा को प्रेसिडेंट बनते ही सबसे पहले आईसीसी में भारत को स्थान दिलाने, हितों के टकराव के मुद्दे को बेहतर तरीके से सुलझाने और घरेलू क्रिकेट का ढांचा मजबूत करने के बड़े मुद्दे हैं। आइए जानते हैं अध्यक्ष बनने के बाद गांगुली को कौन-सी चुनौतियां मिलेंगीं।

1. आईसीसी में भारत की स्थिति समस्या 
यह किसी से छिपा नहीं है कि आईसीसी में भारत का रूतबा घटा है और आईसीसी के नए कार्यसमूह में बीसीसीआई का कोई प्रतिनिधि नहीं है। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के विश्वासपात्र सुंदर रमन द्वारा तैयार किए गए ‘बिग थ्री माडल’ (इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और भारत) के तहत भारत को आईसीसी के राजस्व आवंटन माडल में से 57 करोड़ डालर मिलने थे। शशांक मनोहर के आने के बाद हालांकि भारत बिग थ्री माडल पर सहमति नहीं बना सका और उसे 2016-2023 सत्र के लिए 29 करोड़ 30 लाख डालर से ही संतोष करना पड़ा जो इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड से 15 करोड़ अधिक हैै। सौरव गांगुली को बीसीसीआई प्रतिनिधि के तौर पर आईसीसी से बात करनी होगी। बोर्ड को 40 करोड़ डालर मिल सकते हैं। गांगुली ने प्रेस कांफ्रेंस में भी 37 करोड़ 20 लाख डालर मिलने की बात कही। वैसे अगर एन श्रीनिवासन या सुंदर रमन बीसीसीआई प्रतिनिधि के तौर पर आईसीसी में जाते हैं और बीसीसीआई के पास मत नहीं होते तो टकराव की स्थिति बन सकती है।

2. टी-20 विश्व कप 2016 और भावी आईसीसी टूर्नामेंटों को भारत में कर छूट
गांगुली को बीसीसीआई की कानूनी और वित्तीय टीमों से पूरा सहयोग चाहिये होगा क्योंकि आईसीसी भारत में सभी टूर्नामेंटों के लिए कर में छूट चाहती हैै। मनोहर ने यह भी चेतावनी दी है कि करों का सारा बोझ बीसीसीआई के सालाना राजस्व पर पड़ेगा। इसका हल यह निकल सकता है कि आईसीसी के प्रसारक स्टार स्पोट्र्स को कर का बोझ वहन करने को कहा जाएगा जिसका भारत में पूरा बुनियादी ढांचा है और उसे प्रोडक्शन उपकरण आयात नहीं करने होंगे।

3. घरेलू क्रिकेटरों को भुगतान
भारतीय क्रिकेट के बरसों पुराने इस मसले को गांगुली ने प्राथमिकता बताया है। फिलहाल प्रथम श्रेणी क्रिकेटर को एक लाख 40 हजार रुपए प्रति मैच मिलता है। सत्र के आखिर में बीसीसीआई अपने सालाना सकल राजस्व का 13 प्रतिशत भी उन्हें बांटता है। एक सत्र में एक घरेलू क्रिकेटर को 25 लाख रुपए मिल जाते हैं तो चार दिवसीय, लिस्ट ए और टी-20 मैच खेलता है। अंतराष्ट्रीय क्रिकेटरों की कमाई कहीं ज्यादा है। उन्हें एक टेस्ट के 15 लाख रूपये, वनडे के 8 लाख और टी-20 के चार लाख रूपये मिलते हैं । इसके अलावा 20 क्रिकेटरों के सालाना केंद्रीय अनुबंध भी हैं।

4. घरेलू ढांचा
देवधर ट्राफी, रणजी ट्राफी का ढांचा और अंपायरिंग का स्तर। टूर्नामेंटों की संख्या में कटौती और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए बेहतर पिचें।

5. हितों का टकराव
गांगुली खुद इसके भुक्तभोगी रहे हैं और अपने साथियों सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण को भी इस विवाद का सामना करते देखा है। इस नियम के तहत एक व्यक्ति एक ही पद संभाल सकता है। इससे क्रिकेट सलाहकार समिति और राष्ट्रीय चयन समिति में अच्छे क्रिकेटरों को लाने के विकल्प कम हो जाएंगे।

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