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नई दिल्ली : भारत के शीर्ष पहलवान बजरंग पूनिया को अपनी चोटों से तेजी से उबरने के लिए किसी फिजियो की सेवाएं नहीं मिल रही हैं। तोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता ने फिजियो की सेवाए लेने के लिए पिछले कुछ महीनों में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई), खेल एनजीओ जेएसडब्ल्यू और भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के दरवाजे खटखटाए लेकिन अभी तक अधिकारियों से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। 

बजरंग का कहना है कि अगर उनके पास व्यक्तिगत फिजियोथेरेपिस्ट होता तो वह दो प्रतियोगिताओं में खेल सकते थे जिसमें एक रैंकिंग सीरीज टूर्नामेंट था। सोनीपत में जनवरी के अंत में राष्ट्रीय शिविर शुरू होने के समय ट्रेनिंग के दौरान उनके बाएं घुटने में खिंचाव होने लगा जिसके कारण वह तुर्की में यासर डोगू रैंकिंग सीरीज टूर्नामेंट में नहीं खेल सके। वह ईरान में अपने कोच सुजीत मान के साथ दो हफ्ते तक रहे लेकिन फिजियो नहीं होने की वजह से उनकी चोट से उबरने की प्रक्रिया में देरी हुई। 

बजरंग ने आगामी एशियाई चैम्पियनशिप के लिये 65 किग्रा ट्रायल जीतने के बाद पत्रकारों से कहा कि मैं एक डॉक्टर के साथ गया था लेकिन अच्छा होता कि अगर मेरे पास फिजियो होता। मैंने सारा रिहैब खुद ही किया। अगर मेरे पास फिजियो होता तो मैं तेजी से उबर सकता था और उन टूर्नामेंट में खेल सकता था। मैं तोक्यो ओलंपिक के बाद से ही फिजियो के बिना हूं। एक अमोदित्य नाम के फिजियो थे, लेकिन उनका निधन हो गया। मैंने डब्ल्यूएफआई, जेएसडब्ल्यू और साइ से भी पूछा लेकिन अभी तक कोई फिजियो नहीं मिला है।

महासंघ के सहायक सचिव विनोद तोमर ने पीटीआई से कहा कि उन्हें बजरंग को फिजियो देने में कोई परेशानी नहीं है, बल्कि उन्होंने उनके अनुरोध को मंजूरी दे दी लेकिन रेलवे ने उस फिजियो को देने से इनकार कर दिया जिन्हें यह पहलवान चाहता था। बजरंग रेलवे के फिजियो आनंद दुबे की मदद लेना चाहते थे लेकिन पता चला है कि रेलवे की ऐसी कोई नीति नहीं है कि वह अपने स्टाफ को व्यक्तिगत सेवाओं के लिये दे दे। दुबे ने तोक्यो ओलंपिक के दौरान बजरंग की मदद की थी जो भारतीय टेनिस टीम के साथ थे। वह भारतीय कुश्ती टीम की मदद के लिये उनके साथ रूके थे।  

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