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स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) 7 जुलाई को अपना 38वां जन्मदिन मनाएंगे। 'कैप्टन कूल' के नाम से मशहूर धोनी का 7 जुलाई 1981 में रांची में जन्मे थे। उन्होंने 23 दिसम्बर 2004 को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे इंटरनेशनल से शुुरुआत की थी। धोनी के क्रिकेट करियर के सबसे सफल कप्तानों की लिस्ट में शामिल हैं और बतौर कप्तान कई रिकॉर्ड तोड़े हैं और ऊंचाईयों पर खड़े हैं। आइए जानते हैं रेलवे में नौकरी करते-करते कैसे हुआ था इंडिया टीम में सिलेक्शन - 

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महेंद्र सिंह धोनी पहली बार कब बने थे विकेटकीपर 

रांची के जवाहर विद्यालय में धोनी की पढ़ाई हुई और इसी स्कूल में सबसे पहले धोनी ने क्रिकेट का बल्ला भी थामा था। सन् 1992 में जब धोनी छठी क्लास में थे जब उनके स्कूल को एक विकेट कीपर की जरूरत थी। इसी दौरान उन्हें पहली बार विकेटकीपिंग करने का मौका मिला। जब स्कूल के दोस्त पढ़ाई से समय बचने पर खेलते थे तब  क्रिकेट से समय मिलने पर पढ़ाई किया करते थे। स्कूल के बाद धोनी जिलास्तरीय कमांडो क्रिकेट क्लब से खेलने लगे थे। इसके बाद उन्होंने सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड की टीम से भी क्रिकेट खेला और हर जगह अपने खेल से लोगों का दिल जीतते चले गए।

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रेलवे में नौकरी कर चुके हैं महेंद्र सिंह धोनी

धोनी बिहार रणजी टीम के लिए खेलते थे और इसी दौरान रेलवे में बतौर टिकट कलेक्टर उनकी नौकरी लग गई। धोनी की पहली पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में हुई थी और 2001 से 2003 तक धोनी खड़गपुर के स्टेडियम में क्रिकेट खेला करते थे। दोस्तों के मुताबिक ईमानदारी से अपनी नौकरी करने वाले धोनी जितना ड्यूटी के दौरान लगन से काम करते थे, उतना ही समय क्रिकेट को भी दिया करते थे। धोनी वहां रेलवे की टीम के लिए भी खेला करते थे।

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महेंद्र सिंह धोनी टीम इंडिया में सिलेक्शन

साल 2003-2004 में धोनी को जिंबाब्वे और केन्या दौरे के लिए भारतीय ‘ए’ टीम में चुना गया। जिंबाब्वे के खिलाफ उन्होंने विकेटकीपर के तौर पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 7 कैच और 4 स्टंपिंग कीं। इस दौरे पर बल्लेबाजी करते हुए धोनी ने 7 मैचों में 362 रन भी बनाए। धोनी के प्रदर्शन को देखते हुए तत्कालीन टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें टीम में लेने की सलाह दी। 2004 में धोनी को पहली बार टीम इंडिया में जगह मिली। 

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महेंद्र सिंह धोनी की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट

भारतीय टीम में धोनी को मौका तो मिल गया लेकिन वह पहले मैच में जीरो पर आउट हो गए और इसके बाद भी कई मैचों में धोनी का बल्ला नहीं चला, लेकिन 2005 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई पारी धोनी की जिंदगी टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ और उन्होंने 123 गेंदों पर 148 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए सभी को अपना मुरीद बन लिया। इसके कुछ दिनों बाद ही धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में बल्लेबाजी करते हुए 183 रनों की पारी खेली जो किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज का अब तक का सर्वाधिक निजी स्कोर है। इसके बाद से एक दिवसीय मैचों में उन्हें ‘गेम-चेंजर’ माना जाने लगा।

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