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स्पोर्ट्स डेस्क : ऑस्ट्रेलिया के 34 वर्षीय तेज गेंदबाज Chris Tremain ने दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल कंधे की समस्या के चलते अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। यह बीमारी पिछले लगभग दो वर्षों से उन्हें गेंदबाजी करने से रोक रही थी। न्यू साउथ वेल्स के इस तेज गेंदबाज के 2025-26 सीजन के बाद संन्यास लेने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन चोट से उबरने में आई रुकावट के कारण उन्हें समय से पहले ही अपने करियर को अलविदा कहना पड़ा।

भावुक बयान में कही दिल की बात

न्यू साउथ वेल्स द्वारा जारी बयान में ट्रेमेन ने कहा कि क्रिकेट उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण और साथ ही सबसे संतोषजनक अनुभव रहा है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग टीमों के साथ खेलने के बावजूद उनके भीतर जीतने और प्रतिस्पर्धा करने की भावना हमेशा कायम रही।

उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समर्थन के बिना यह सफर संभव नहीं होता। ट्रेमेन ने माना कि यह यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है, लेकिन यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी।

अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत और सफर

ट्रेमेन ने 2012 में न्यू साउथ वेल्स के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया था। अपने लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2016 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया। उस दौरे पर खेले गए चार वनडे मैचों में उन्होंने सात विकेट हासिल किए। हालांकि इसके बाद उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टीम में दोबारा मौका नहीं मिल पाया।

घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड

2014 में ट्रेमेन ने न्यू साउथ वेल्स छोड़कर विक्टोरिया का रुख किया और छह वर्षों तक वहां खेलते रहे। इस दौरान उन्होंने टीम को तीन शेफील्ड शील्ड और एक वनडे कप खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई। 2017-18 सीजन में उन्हें शेफील्ड शील्ड प्लेयर ऑफ द ईयर चुना गया।

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 96 मैचों में 353 विकेट झटके, जिसमें 13 बार पांच विकेट लेने का कारनामा शामिल है। एक मैच में 10 विकेट लेने की उपलब्धि भी उनके नाम रही। लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 57 विकेट लिए, जबकि 52 टी20 मुकाबलों में 46 विकेट चटकाए।

बिग बैश लीग में योगदान

ट्रेमेन ने बिग बैश लीग में Sydney Thunder और Melbourne Renegades का प्रतिनिधित्व किया। 49 बीबीएल मुकाबलों में उन्होंने 41 विकेट हासिल किए। वह 2018-19 सीजन में मेलबर्न रेनेगेड्स की उस टीम का हिस्सा थे जिसने अपना पहला बीबीएल खिताब जीता था।