नई दिल्ली : रविचंद्रन अश्विन ने अपने करियर के शुरुआती दौर का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के अपने पहले दौरे के बाद संजय मांजरेकर की फिटनेस को लेकर की गई आलोचना से वह काफी आहत हुए थे। यही वजह थी कि उन्होंने लंबे समय तक मांजरेकर से बातचीत नहीं की। हालांकि, बाद में अश्विन ने माना कि उसी आलोचना ने उन्हें खुद को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।
ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद मांजरेकर की बात से आहत हुए अश्विन
अश्विन ने जियोहॉटस्टार के साथ बातचीत में बताया कि ऑस्ट्रेलिया के अपने पहले दौरे के बाद मांजरेकर ने एक लंबा लेख लिखा था, जिसमें उनकी फिटनेस पर सवाल उठाए गए थे। अश्विन ने वह लेख पूरा पढ़ा और उनकी बातों से काफी निराश हुए।
अश्विन ने कहा, 'मैंने संजय मांजरेकर को एक बार मैसेज किया था। मेरे पहले ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद उन्होंने एक लंबा लेख लिखा था और मैंने वापसी के दौरान उसे पूरा पढ़ा। पढ़ने के बाद मुझे गुस्सा आया। गुस्सा आना एक बात है, लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा।'
उन्होंने आगे बताया कि उस घटना के बाद उन्होंने मांजरेकर से ज्यादा बातचीत नहीं की। अश्विन ने कहा, 'मैं उनसे ज्यादा बात भी नहीं करता था। अगले चार साल मैंने अपने ऊपर बहुत काम किया, क्योंकि मैं कोई बहुत प्रतिभाशाली एथलीट नहीं था।'
चार साल की मेहनत के बाद बदली तस्वीर
आलोचना को दिल पर लेने के बजाय अश्विन ने उसे अपनी कमजोरी दूर करने की प्रेरणा बना लिया। उन्होंने अपनी फिटनेस के साथ-साथ खेल के दूसरे पहलुओं पर भी कड़ी मेहनत की।
2015 में जब अश्विन दोबारा ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे, तो उनके प्रदर्शन में काफी सुधार नजर आया। इस बार मांजरेकर ने उनकी तारीफ करते हुए एक लेख लिखा। यही वह पल था जब अश्विन को महसूस हुआ कि पहले की आलोचना ने उनके करियर को एक नई दिशा दी थी।
अश्विन ने बताया, '2015 में उन्होंने एक और लेख लिखा और कहा कि मैं बहुत अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं। तब मैंने उनका नंबर मांगा और उन्हें मैसेज किया कि उस समय लिखे आपके लेख ने मेरी जिंदगी बदल दी।'
मांजरेकर की आलोचना ने बदल दिया अश्विन का नजरिया
अश्विन ने बाद में माना कि मांजरेकर की उस टिप्पणी ने उन्हें अपने फिटनेस स्तर और खेल में सुधार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने खुद को एक बेहतर क्रिकेटर बनाने के लिए लगातार मेहनत की और आगे चलकर भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल स्पिनरों में अपनी जगह बनाई।
शुरुआत में दोनों के बीच जो दूरी बनी थी, वह 2015 तक काफी हद तक खत्म हो गई। मांजरेकर की आलोचना और बाद में मिली प्रशंसा ने अश्विन के करियर के एक अहम दौर को प्रभावित किया।