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न्यूयार्क : एक बरस पहले लगातार मिली नाकामियों और चोट के कारण विश्व रैंकिंग में शीर्ष 200 के बाहर हो चुकी बियांका आंद्रिस्कू को यकीन था कि एक दिन उसके सपने जरूर पूरे होंगे और सेरेना विलियम्स जैसी धुरंधर को हराकर अमेरिकी ओपन खिताब जीतकर वह युवा खिलाड़ियों के लिए नज़ीर बन गई है। पिछले साल इस सतय आंद्रिस्कू अमेरिकी ओपन के मुख्य ड्रा में जगह नहीं बना पाने के बाद चोटिल होकर घर बैठी थी। 

यहां 23 बार की चैम्पियन सेरेना को हराकर खिताब जीतने के बाद उन्होंने कहा, ‘यह जीवन की प्रक्रिया है। हमेशा वक्त अच्छा या बुरा नहीं रहता। आपको अपने सपने पूरे करने के लिए मेहनत करते रहनी होती है। एक दिन बिगड़ी किस्मत संवर ही जाती है।' कनाडा की पहली ग्रैंडस्लैम एकल चैम्पियन 19 बरस की आंद्रिस्कू ने कहा, ‘यह पहली बार नहीं था जब मैने सेरेना विलियम्स के खिलाफ फाइनल खेलने की कल्पना की होगी  यह अद्भुत है। यह लंबे समय से मेरा सपना था और मुझे यकीन था कि यह पूरा होगा।' 

उन्होंने कहा, ‘यह मेरा लक्ष्य था कि कनाडा के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनूं। उम्मीद है कि अब ऐसा होगा। यदि मैं जीत सकती हूं, रोजर फेडरर जीत सकते हैं, सेरेना जीत सकती है, स्टीव नैश (दो बार एनबीए के सबसे कीमती खिलाड़ी) जीत सकते हैं तो कोई भी जीत सकता है।' 

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