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स्पोर्ट्स डेस्क : कृष्णा नागर रविवार को टोक्यो पैरालिंपिक में बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए है। योयोगी नेशनल स्टेडियम में कृष्णा ने पुरुष एकल एसएच 6 के फाइनल में चू मान काई को तीन गेम में 21-17, 16-21, 17-21 से हराकर गोल्ड जीता। 

राजस्थान के रहने वाले 22 वर्षीय कृष्णा ने अपनी BWF विश्व रैंकिंग की बदौलत टोक्यो में पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। उन्होंने अप्रैल में दुबई 2021 पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल में दो स्वर्ण पदक जीते थे। दूसरी वरीयता प्राप्त भारतीय का कद छोटा है जिसके बारे में उसके परिवार को तब पता चला जब कृष्ण दो वर्ष के थे। 

बड़े होकर यह स्वीकार करते हुए कि वह कुछ खेलों में भाग नहीं ले पाएंगे, कृष्णा ने महसूस किया कि वह तेजी से दौड़ सकते हैं इसलिए दौड़ना पहली पसंद बन गया। हालांकि अपने चचेरे भाई से प्रोत्साहित होकर उन्होंने 2014 में बैडमिंटन में कदम रखा और तीन साल बाद उन्होंने गंभीरता से इस खेल को खेलना शुरू किया। 

उन्होंने पिछले साल एक साक्षात्कार में बीडब्ल्यूएफ को बताया था कि ऐसे कई खेल थे जो मैं (स्कूल में) नहीं खेल सकता था, लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मैं तेजी से दौड़ सकता हूं इसलिए मैं हर समय स्प्रिंट का अभ्यास करूता। तब मुझे बैडमिंटन मिला। मैं वास्तव में ऊंची छलांग लगा सकता हूं और मैं तेज दौड़ता हूं। यह मुझे अपनी क्षमताओं का पूरी तरह से परीक्षण करने की अनुमति देता है। 

प्रमोद भगत के शनिवार को स्वर्ण (एसएल3) जीतकर इतिहास रचने के बाद कृष्णा बैडमिंटन में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय हैं। मनोज सरकार ने तब इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था और इससे पहले रविवार को सुहास यतिराज ने एसएल4 स्पर्धा में रजत पदक जीता था। 

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