स्पोर्ट्स डेस्क : आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में भारतीय ओपनर Abhishek Sharma ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में उन्होंने सिर्फ 21 गेंदों में 52 रन की तेज पारी खेली जिसमें 18 गेंदों पर अर्धशतक शामिल था। इस शानदार प्रदर्शन के बाद अभिषेक ने एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस मैच में उन्होंने अपने साथी खिलाड़ी Shivam Dube का बैट इस्तेमाल किया था, जिसने उनकी लय वापस पाने में मदद की। भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ 96 रन से जीत दर्ज करते हुए टी20 विश्व कप में तीसरा खिताब जीता।
फाइनल में खेली मैच बदलने वाली पारी
भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए फाइनल में अभिषेक शर्मा ने बेहद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने सिर्फ 21 गेंदों में 52 रन बनाए, जिसमें कई शानदार चौके और छक्के शामिल थे। अभिषेक ने अपनी फिफ्टी सिर्फ 18 गेंदों में पूरी की और भारत को तेज शुरुआत दिलाई। उनकी इस पारी ने भारत के बड़े स्कोर की नींव रखी, जिसके दम पर टीम ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर खिताब जीत लिया।
शिवम दुबे के बैट से बदली किस्मत
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिषेक शर्मा ने एक मजेदार खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस मुकाबले में उन्होंने अपने साथी खिलाड़ी शिवम दुबे का बैट इस्तेमाल किया था। अभिषेक ने कहा कि मैच की सुबह उनका मन कुछ अलग करने का था। उस समय टीम के कप्तान Shubman Gill आसपास नहीं थे, इसलिए उन्होंने सीधे शिवम दुबे से बैट लेकर खेलने का फैसला किया। उनके अनुसार दुबे के बैट से खेलना उनके लिए लकी साबित हुआ और उन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ दिया।
टूर्नामेंट में संघर्ष के बाद दमदार वापसी
अभिषेक शर्मा के लिए यह टूर्नामेंट आसान नहीं रहा। फाइनल से पहले पूरे टूर्नामेंट में वह संघर्ष करते नजर आए और सिर्फ 89 रन ही बना पाए थे। इसके अलावा वह पेट के संक्रमण से भी जूझ रहे थे, जिसने उनकी फॉर्म को प्रभावित किया। लेकिन फाइनल जैसे बड़े मैच में उन्होंने खुद को साबित करते हुए शानदार वापसी की। उनकी इस पारी ने न केवल भारत को मजबूत शुरुआत दी बल्कि आलोचकों को भी जवाब दिया।
टीम के सपोर्ट से मिला आत्मविश्वास
अभिषेक ने अपने संघर्ष के दौर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से वह खराब फॉर्म से जूझ रहे थे, लेकिन टीम के सपोर्ट ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उनके अनुसार, जब वह रन नहीं बना पा रहे थे तब भी टीम के साथी, कोच और सपोर्ट स्टाफ लगातार उन पर भरोसा जताते रहे। यही विश्वास उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।