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स्पोर्ट्स डेस्क : फार्म में चल रहे भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के खिलाफ दो दिन पहले पश्चिम बंगाल की अलीपुर कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर उन्हें 15 दिनों के अंदर सरेंडर करने को कहा था। इस मामले में शमी के वकील का कहना है कि कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया है बल्कि उन्हें 15 दिनों के अंदर कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने वारंट की गलत व्याख्या की है।

शमी के वकील का बयान 

शमी के वकील रहमान ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि घरेलू हिंसा मामले में शमी को 15 दिन के अंदर कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। शमी के वकील ने कहा कि मेरा मुवक्किल फरार नहीं है। वह एक राष्ट्रीय खिलाड़ी है और देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उसे किसी भी समय पहचाना जा सकता है। वह क्यों भाग जाएगा? 

रहमान ने कहा कि लोगों ने वारंट की गलत व्याख्या की है। उन्होंने साफ किया कि कोर्ट ने कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया बल्कि अपने आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि शमी को 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। उन्होंने कहा कि हम उनकी वापसी होने पर (वेस्टइंडीज से भारत आने पर) उचित कानूनी कदम उठाएंगे। गिरफ्तारी वारंट तभी प्रभाव में आता है जब आप तय समयसीमा में आत्मसमर्पण नहीं करते। लेकिन मुझे यकीन है कि ऐसी नौबत ही नहीं आएगी। वह इससे पहले ही कोलकाता पुलिस के सामने दो बार पेश हो चुके हैं और ऐसा कोई भी कारण नहीं है कि वे इस बार भी सहयोग नहीं करेंगे।' 

क्या है पूरा मामला 

साल 2018 में शमी की पत्नी हसीन जहां ने उनपर दूसरी महिलाओं से संबंध रखने के आरोप लगाते हुए कहा था कि शमी और उसके परिवार द्वारा उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है। इसी के साथ ही शमी पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगाए गए थे लेकिन बाद में बीसीसीआई ने शमी को फिक्सिंग मामले में क्लिन चिट दी दी थी। हसीन ने कहा था कि शमी के परिवार वालों ने उन्हें मारने की भी कोशिश की थी। वहीं, शमी ने इन सभी आरोपों से इंकार किया था। 

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