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खेल डैस्क : मुंबई रणजी ट्रॉफी के नवीनतम संस्करण की चैम्पियन बनी। मुंबई को जीत दिलाने में तनुश कोटियन के हरफनमौला प्रदर्शन का अहम योगदान रहा। बल्ले से 502 रन बनाने के साथ 29 विकेट लेने वाले तनुष को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में भी महत्वपूर्ण 7 विकेट चटकाए।

 

 

प्लेयर ऑफ द सीरीज बनने पर तनुश कोटियन ने कहा कि जब सीजन शुरू हुआ, तो हम यह रणजी ट्रॉफी जीतना चाहते थे क्योंकि दो साल पहले हम उपविजेता थे। हम इस कप को पाने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे और आखिरकार इसे हासिल करके बहुत खुश हैं। पिछले सीज़न के प्रदर्शन ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया। मेरे पिता, मेरे कोच और अज्जू दा ने मेरे साथ बहुत मेहनत की है, उन्होंने पूरे रास्ते मेरा मार्गदर्शन किया है। टीम का माहौल बहुत अच्छा था, हम पूरे समय अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन नॉकआउट में मुश्किल आई। खासकर तेज गेंदबाजों के लिए जो बहुत अधिक ब्रेक के बिना खेल रहे थे। हमने एक टीम के रूप में अच्छा खेला, इस सीजन में निचले क्रम में बल्लेबाजी भी शानदार रही।

 

 

10वें नंबर पर आकर लगा चुके शतक
मुंबई के हरफनमौला खिलाड़ी तनुष कोटियन ने तुषार देशपांडे के साथ मिलकर बीकेसी ग्राउंड में बड़ौदा के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान रणजी ट्रॉफी इतिहास में दसवें विकेट के लिए दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी की थी। उडुपी मूल के तनुष कोटियन और देशपांडे ने मिलकर 10वें विकेट के लिए 232 रन बनाए। तनुष 10वें नंबर पर आकर शतक लगाने वाले पहले प्लेयर बने। तनुश ने सीजन के 10 मैचों में बल्ले के साथ 502 रन बनाए। वह 5 अर्धशतक और एक शतक जमाने में भी सफल रहे। वहीं गेंद के साथ भी धमाल मचाते हुए उन्होंने 29 विकेट चटकाए।

 

 


रणजी ट्रॉफी के टॉप स्कोरर
939 रन : अग्नि चोपड़ा
902 रन : रिकी भुई
830 रन : सचिन बेबी
829 रन : चेतेश्वर पुजारा
816 रन : एन जगदीशन


रणजी ट्रॉफी के टॉप विकेटटेकर
56 विकेट : तनय त्यागराजन
53 विकेट : रविश्रीनिवासन साई किशोर
43 विकेट : मोहित जांगड़ा
41 विकेट : कुमार कार्तिकेय
41 विकेट : एस अजित राम


मुंबई के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने कहा- 
मैं विदर्भ के प्लेयरों की सराहना करता हूं। उन्होंने संघर्ष दिखाया। वे पिछले 7-8 साल से जिस तरह से खेल रहे हैं वह देखना शानदार है। हमारे लिए रणजी जीत  वाकई खास है। पिछले साल, हम 1 रन से क्वालीफाई नहीं कर पाए थे इससे हमें वास्तव में दुख हुआ था। हम जानते थे कि हमारे पास प्रतिभा हैं, लेकिन जो महत्वपूर्ण है वह सही संस्कृति और दृष्टिकोण का निर्माण करना है। मैं एमसीए को भी उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। 

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विदर्भ के कप्तान अक्षय वाडकर ने कहा-
हमारी पहली पारी अच्छी नहीं गई। पहली पारी में मुंबई को जल्दी आउट करने के बाद हमें अच्छी बल्लेबाजी करनी थी। हालांकि, हम ऐसा नहीं कर सके और यहीं हम इस फाइनल में पिछड़ गए। मुंबई ने वास्तव में अच्छी गेंदबाजी की, खासकर धवल कुलकर्णी ने। पिच पर बल्लेबाजी करना मुश्किल हो रहा था, लेकिन मुंबई के बल्लेबाजों ने गजब का जज्बा दिखाया। श्रेयस ने जिस तरह से कुछ गेंदों में तेजी से रन बनाए उसने हमसे लय छीन ली।

 

मुकाबले की बात करें तो मुंबई ने 8 साल का इंतजार खत्म करते हुए अपना ही रिकॉर्ड बेहतर करके 42वीं बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीता। फाइनल के पांचवें और आखिरी दिन मेजबान ने विदर्भ को 169 रन से हराया। टूर्नामेंट के इतिहास में 90 में से 48वीं बार मुंबई फाइनल में पहुंची थी। वानखेड़े स्टेडियम पर खेले गए फाइनल में विदर्भ को 538 रन का लक्ष्य मिला था। विदर्भ के कप्तान अक्षय वाडकर (102) और हर्ष दुबे (65) ने अच्छा खेल दिखाया लेकिन टीम को हार झेलनी पड़ी।

 

फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों की प्लेइंग-11
मुंबई :
पृथ्वी शॉ, भूपेन लालवानी, मुशीर खान, अजिंक्य रहाणे (कप्तान), श्रेयस अय्यर, हार्दिक तमोरे (विकेटकीपर), शम्स मुलानी, शार्दुल ठाकुर, तनुष कोटियन, धवल कुलकर्णी, तुषार देशपांडे।
विदर्भ : अथर्व तायडे, ध्रुव शोरे, अमन मोखड़े, करुण नायर, यश राठौड़, अक्षय वाडकर (विकेटकीपर/कप्तान), आदित्य सरवटे, उमेश यादव, हर्ष दुबे, यश ठाकुर, आदित्य ठाकरे।