स्पोर्ट्स डेस्कः टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी (शनिवार) से हुई। टूर्नामेंट के पहले दिन तीसरा मुकाबला भारत और अमेरिका (USA) के बीच खेला गया। इस मैच में अमेरिकी टीम की ओर से स्पिन गेंदबाज हरमीत सिंह मैदान पर उतरे। खास बात यह है कि हरमीत पहले भारत के लिए खेल चुके हैं और दो बार अंडर-19 वर्ल्ड कप का हिस्सा भी रह चुके हैं। बाद में उन्होंने अमेरिका जाकर क्रिकेट खेलना शुरू किया और अब लगातार दूसरे टी20 वर्ल्ड कप में USA का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
मुंबई से अमेरिका तक का सफर
हरमीत सिंह का जन्म मुंबई में हुआ था। उन्होंने शुरुआती क्रिकेट भारत में ही खेला। मुंबई के अलावा उन्होंने कुछ अन्य राज्यों की टीमों के लिए भी घरेलू क्रिकेट खेला। बचपन से ही वे प्रतिभाशाली स्पिनर माने जाते थे और कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली थी।
भारत के लिए दो अंडर-19 वर्ल्ड कप खेले
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2010 अंडर-19 वर्ल्ड कप – इस टूर्नामेंट में हरमीत की गेंदबाजी महंगी साबित हुई और वे ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाए।
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2012 अंडर-19 वर्ल्ड कप – इस बार उन्होंने शानदार वापसी की। उनकी गेंदबाजी बेहद किफायती रही और उनकी इकॉनमी सिर्फ 3.02 रन प्रति ओवर रही, जो बेहतरीन प्रदर्शन माना जाता है।
आईपीएल विवाद से भी जुड़ा नाम
हरमीत सिंह 2013 में आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा भी रहे और उन्होंने एक मैच भी खेला। उसी साल आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग विवाद सामने आया। एक सट्टेबाज ने दावा किया कि उसने हरमीत को फिक्सिंग में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी कम उम्र के कारण यह सौदा नहीं हो पाया।
इसके बाद बीसीसीआई ने जांच की और हरमीत सिंह को इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई। यानी उन पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ।
अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर
भारत छोड़ने के बाद हरमीत सिंह ने अमेरिका में क्रिकेट खेलना शुरू किया और वहां की राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई। अब तक उन्होंने अमेरिका के लिए 22 वनडे मैच खेले हैं और 31 विकेट लिए हैं। 25 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और 24 विकेट झटके हैं। वे अमेरिका के अहम स्पिन गेंदबाज माने जाते हैं और टीम के अनुभवशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं।
क्यों खास है उनकी कहानी?
हरमीत सिंह की कहानी इसलिए खास है क्योंकि वे भारत में पले-बढ़े, भारत के लिए वर्ल्ड कप खेले। फिर अमेरिका गए और वहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बने और अब वे उसी अमेरिका टीम के लिए भारत के खिलाफ खेल रहे हैं। यह क्रिकेट की बदलती दुनिया का एक दिलचस्प उदाहरण है, जहां खिलाड़ी अपने करियर के लिए दूसरे देश का प्रतिनिधित्व भी कर सकते हैं।