स्पोर्ट्स डेस्क : वरिष्ठ वेस्टइंडीज ऑलराउंडर जेसन होल्डर ने एशिया कप 2025 के बाद सामने आए ट्रॉफी विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत द्वारा पाकिस्तान को हराने के बाद ट्रॉफी लेने से इनकार करने की घटना को होल्डर ने “हद से ज़्यादा” बताया और कहा कि इस तरह की चीज़ें क्रिकेट जैसे खेल में नहीं होनी चाहिए।
एशिया कप 2025 की घटना से होल्डर हुए असहज
‘गेम ऑन विद ग्रेस’ कार्यक्रम में बातचीत के दौरान होल्डर ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ती कड़वाहट उन्हें बेहद दुखी करती है। उन्होंने कहा कि भारत की जीत के बाद ट्रॉफी न लेने का फैसला खेल भावना के खिलाफ था और इससे गलत संदेश गया। 'मुझे भारत-पाकिस्तान की यह दुश्मनी पसंद नहीं है। यह क्रिकेट से कहीं आगे निकल चुकी है। एशिया कप जीतने के बाद ट्रॉफी न लेना बहुत ज़्यादा था,' होल्डर ने कहा।
राजनीतिक तनाव की छाया में खेला गया एशिया कप
एशिया कप 2025 ऐसे समय में खेला गया जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर था। 2012 से द्विपक्षीय सीरीज़ बंद है, लेकिन आईसीसी और एसीसी टूर्नामेंट्स में दोनों टीमें आमने-सामने आती रही हैं। ऐसे मुकाबलों पर राजनीति का असर साफ दिखता है।
‘क्रिकेटर दुनिया के एंबेसडर होते हैं’
पूर्व वेस्टइंडीज कप्तान ने कहा कि भारत और पाकिस्तान जैसे बड़े क्रिकेटिंग देश सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी छवि के लिए भी जिम्मेदार हैं। 'खिलाड़ी दुनिया के एंबेसडर होते हैं। अगर हम शांति और बेहतर दुनिया की बात करते हैं, तो यह वह तस्वीर नहीं है जो आप अपने आदर्शों से देखना चाहते हैं,' उन्होंने कहा।
नेतृत्व और प्रभावशाली लोगों से बदलाव की उम्मीद
होल्डर का मानना है कि बदलाव ऊपर से आना चाहिए। 'अगर बदलाव आना है तो प्रभावशाली लोगों से आना चाहिए। भारत और पाकिस्तान क्रिकेट की महाशक्तियां हैं। अगर ये मैदान पर एकता दिखाएं, तो इसका संदेश क्रिकेट से कहीं आगे जाएगा।' उनके मुताबिक, हाथ मिलाना या आपसी सम्मान दिखाना भी बड़ा असर डाल सकता है।
T20 वर्ल्ड कप 2026 पर टिकी निगाहें
भारत और पाकिस्तान की अगली भिड़ंत T20 वर्ल्ड कप 2026 में 15 फरवरी को कोलंबो में होगी। यह मुकाबला दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले मैचों में से एक माना जा रहा है। होल्डर चाहते हैं कि इस बार चर्चा दुश्मनी नहीं, बल्कि खेल भावना की हो।
संयम और संतुलन की दुर्लभ आवाज
होल्डर ने दोनों देशों के जटिल इतिहास को समझते हुए कहा कि खेल एक ऐसा मंच है, जहां से सकारात्मक संदेश जा सकता है। 'अगर वे खेल के स्तर पर ऐसा कर सकते हैं, तो लोग कह सकते हैं कि जब यहां हो सकता है, तो आम ज़िंदगी में भी क्यों नहीं,' उन्होंने कहा।