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जालन्धर : पंजाब स्टेट इंफोर्मेशन कमीशन (पी.एस.आई.सी.) ने डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन जालन्धर को पब्लिक अथॉरिटी घोषित कर दिया है। कमीशन ने जालन्धर के डिप्टी कमिश्रर जोकि एसोसिएशन के प्रेसिडैंट भी हैं, को निर्देश दिए हैं कि वह सारी मूलभूत कमियों को दूर कर 15 दिन के अंदर एसोसिएशन को राइट टू इंफोर्मेशन यानी आर.टी.आई. के अंदर लाएं। स्टेट इंफोर्मेशन कमिश्नर खुशवंत सिंह ने जालन्धर के रहने वाले वारिस मलिक की उक्त शिकायत पर आदेश जारी किए हैं।

वारिस ने रायजादा हंस राज स्टेडियम में काम कर रहे बैडमिंटन कोच से इनकम और खर्च संबंधी आर.टी.आई. से ब्यौरा मांगा था। लेकिन एसोसिएशन ने खुद को आर.टी.ए. एक्ट में नहीं माना और संबंधित जानकारी देने से इंकार कर दिया था। वारिस ने इसके साथ ही एम.पी. फंड से आई 15 लाख की ग्रांट का ब्यौरा भी मांगा था। इसके जवाब में एसोसिएशन ने कहा था- एसोसिएशन में 12 एग्जीक्यूटिव मेंबर्स हैं जिन्हें एक आई.ए.एस. और एक पी.सी.एस. ऑफिसर शामिल है। रही फंड की बात तो 15 लाख रुपए उन्हें सीधे नहीं मिले बल्कि पी.डब्ल्यू.डी. डिपार्टमैंट को मिले थे।

कमिश्रनर खुशवंत सिंह ने जब इसकी जांच की तो पाया कि स्पोटर््स एसोसिएशन के पास सरकारी अफसर बतौर मेंबर्स हैं। इसलिए यह पब्लिक अथॉरिटी बनता है, इसे आर.टी.आई. एक्ट के अधीन रहना चाहिए। कमीशन के सामने सवाल यह भी था कि क्या यह एसोसिएशन बिना डिस्ट्रिक एडिमिनेस्ट्रेशन के अपने प्रोग्राम या कर्तव्य निभाने में सक्ष्म है, जबकि सरकार की तरफ से विभिन्न प्रकार से फंड भी आ रहे हैं जिसमें सरकार और डिस्ट्रिक एडिमिनेस्ट्रेशन की ओर से इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं भी शामिल हों।

कमिश्रनर ने पाया कि बैडमिंटन एसोसिएशन सरकार से आए फंड को बिना डिस्ट्रिक एडिमिनेस्ट्रेशन की मदद से नहीं इस्तेमाल कर सकती। वैसे भी एसोसिएशन बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया से भी जुड़ी है जोकि पहले से आर.टी.आई. एक्ट के अधीन है। केस की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
 

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